अमेरिका ने साझेदारी की पहली वर्षगांठ पर कहा कि भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र (इंडस-एक्स) रक्षा नवाचार में द्विपक्षीय रिश्तों का विस्तार करने में सबसे आगे रहा है। इंडस-एक्स ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल के तहत रक्षा नवाचार के निर्माण के लिए दोनों रणनीतिक साझेदारों की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है।
इंडस-एक्स क्या है?
इंडस-एक्स भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित एक रक्षा पहल है। यह पहल इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (iCET) के तहत आती है। जानकारी के मुताबिक, इंडस-एक्स के शुभारंभ के संबंध में प्रारंभिक चर्चा जून 2021 में हुई थी।
यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी), अमेरिकी रक्षा विभाग और भारत के रक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी में यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स में 20-21 जून को पहले इंडस-एक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह जानकारी यूएसआईबीसी के अध्यक्ष अतुल केशप ने मंलवार को दी। बता दें कि यह यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की ही एक पहल थी, जिसका फोकस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर है।
इंडस-एक्स के उद्देश्य क्या हैं?
इंडस-एक्स का उद्देश्य अमेरिका और भारतीय रक्षा नवाचार क्षेत्रों के बीच साझेदारी को गहरा करना है। इंडस-एक्स हाई-टेक सहयोग को आगे बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन के अवसरों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। पहल का उद्देश्य सह-उत्पादन जेट इंजन, लंबी दूरी की तोपखाने और पैदल सेना के वाहनों के लिए संभावनाओं का पता लगाना है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने एक बयान में कहा था, 'हम न केवल प्रौद्योगिकी साझा कर रहे हैं, बल्कि हम एक दूसरे के साथ पहले से कहीं अधिक सहयोग भी कर रहे हैं।' इसके महत्व पर अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक बयान में कहा, 'इस पहल का उद्देश्य अमेरिका और भारतीय रक्षा क्षेत्रों के बीच सहयोग के परिप्रेक्ष्य को बदलना है।'