सिंगापोर में एक 60 वर्षीय भारतीय मूल के सिंगापुरी व्यक्ति को चार साल की जेल की सजा सुनाई गई है। आरोप है कि वह एक कंपनी के निदेशक के रूप में अपने दायित्व निभाने में नाकाम रहे थे। उन पर यह भी आरोप है कि उन्हें दिसंबर 2014 और सितंबर 2015 के बीच जर्मनी के वायरकार्ड एजी से 54 मिलियन यूरो (SGD78 मिलियन) से अधिक प्राप्त हुआ।
युवक का नाम थिलागरत्नम राजरत्नम है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह SGD500 प्रति माह के लिए स्ट्रैटेजिक कॉरपोरेट इन्वेस्टमेंट्स नामक एक फर्म के निदेशक बनने के लिए बिना किसी लेनदेन के सहमत हो गये थे।
क्या है वायरकार्ड मनी
दरअसल, वायरकार्ड एजी, एक भुगतान प्रसंस्करण कंपनी है, जिसके खातों से 1.9 बिलियन यूरो की नकदी गायब हो गई थी। इसके बाद कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित किया था। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी मार्कस ब्राउन और कई अन्य शीर्ष अधिकारियों को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
स्ट्रैटेजिक का नेतृत्व करने के बावजूद, थिलागरत्नम को नहीं पता चल सका कि कंपनी को उनके बैंक खातों में वायरकार्ड से पैसा प्राप्त हुआ था। इसके बाद विभिन्न अन्य पार्टियों को हस्तांतरित भी कर दिया गया था। इस अपराध में आरोपी थिलागरत्नम का छोटा भाई भी शामिल है, जिसका नाम आर. शनमुगरत्नम है। वह सिटाडेल कॉर्पोरेट सर्विसेज में निदेशक था।
ये लोग भी थे शामिल
बता दें सिटाडोल कॉर्पोरेट सचिवीय सेवाएं प्रदान करने वाली एक फर्म थी। इसके ग्राहकों में 49 वर्षीय ब्रिटिश जेम्स हेनरी ओ'सुलिवन की स्वामित्व वाली कंपनियां शामिल थीं। आरोपी का भाई शनमुगरत्नम और ओ'सुलिवन दोनों कथित तौर पर यहां वायरकार्ड मामले में शामिल थे।
पिछली मीडिया रिपोर्टों की मानें तो वायरकार्ड सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण (एमएएस) 30 सितंबर, 2020 को इसे बंद करने का आदेश मिला था। इससे पहले वायरकार्ड सिंगापुर यहां लगभग 1,900 कंपनियों को भुगतान प्रसंस्करण सेवाएं प्रदान कर रही थी। फिलहाल, एमएएस, सैंट्रल बैंक ने भी फर्म को अपने सभी ग्राहकों को उनका पैसा दो सप्ताह के भीतर वापस करने का निर्देश दिया है।