कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो ने देश के सुप्रीम कोर्ट में पहले अश्वेत व्यक्ति और भारतवंशी महमूद जमाल को जज के रूप में नामित किया है। जमाल 2019 से ओंटारियो अदालत में अपील जज की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले वे कनाडा के शीर्ष लॉ स्कूल में पढ़ाने का काम कर चुके हैं। इसके अलावा दशकों तक वादी के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
त्रूदो ने कनाडा की सर्वोच्च अदालत में पहली शरणार्थी और यहूदी महिला रोजली लिलबरमैन अबेला के सेवानिवृत्त होने के बाद जमाल के नाम का एलान किया। प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो ने कहा, मुझे सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति महमूद जमाल के नामांकन की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है। मुझे पता है कि न्यायमूर्ति जमाल, अपने असाधारण कानूनी और शैक्षणिक अनुभव तथा दूसरों की सेवा करने के लिए समर्पण के साथ, हमारे देश की सर्वोच्च अदालत के लिए एक मूल्यवान संपत्ति साबित होंगे।
उन्हें ओंटारियो के अपीलीय न्यायालय से पदोन्नत किया गया है। जमाल 1981 में अपने परिवार के साथ कनाडा आए और कानून की पढ़ाई की।
शादी के बाद बहाई धर्म अपनाया
महमूद जमाल ने मैकगिल विश्वविद्यालय और फिर येल यूनिवर्सिटी जाने से पहले अपनी डिग्री के लिए टोरंटो विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। अच्छी अंग्रेजी और फ्रेंच बोलने वाले जस्टिस जमाल सांविधानिक, दीवानी, आपराधिक और नियामक मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 35 अपीलों में पेश हुए हैं। जस्टिस जमाल की शादी गोलेटा से हुई है जो ईरान में 1979 की क्रांति के बाद अपने बहाई धर्म के उत्पीड़न से बचने के लिए शरणार्थी के रूप में कनाडा भाग आई थी। उन्होंने शादी के बाद बहाई धर्म में धर्मांतरण किया।