ईरान के विदेश मंत्री की भारत से विदेश मंत्री एस जयशंकर से अफगानिस्तान को लेकर बात हुई है। अधिकारी ने कहा कि ईरान की नजदीकी भारत और रूस के साथ है और वह अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान की मिलीभगत का विरोध करते रहेंगे।
अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद से उसके छह पड़ोसियों में से एक ईरान काफी आशंकित है। ईरान ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता भी जाहिर की है। गल्फ अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां तक कहा है कि यदि अफगानिस्तान को लेकर टकराव शुरू हुआ तो चीन-पाक एक तरफ होंगे और भारत, रूस तथा ईरान एक तरफ होंगे।
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बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री की भारत से विदेश मंत्री एस जयशंकर से अफगानिस्तान को लेकर बात भी हुई है। अधिकारी ने कहा कि ईरान की नजदीकी भारत और रूस के साथ है और वह अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान की मिलीभगत का विरोध करते रहेंगे।
तेहरान टाइम्स के अनुसार, ईरान के एक सांसद ने पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख फैज हामिद के पंजशीर घाटी में तालिबान की हिंसक कार्रवाई में शामिल होने का आरोप भी लगाया था। इस बीच, टोलो न्यूज पर एक बहस में तालिबान प्रवक्ता सैयद जर्कुराल्लाह हाशमी ने ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में ईरान के भीतर कोई भी सुन्नी मंत्री नहीं बना है जबकि हमारी कैबिनेट में कोई शिया मंत्री नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में शियाओं को कोई पद नहीं मिलेगा।
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पाक के प्रति उदार नहीं रहा ईरान : बासित
ईरान की टिप्पणी पर भारत में उच्चायुक्त रह चुके पाकिस्तान के राजनयिक अब्दुल बासित ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि ईरान को इस मामले में कुछ भी बहुत सतर्कता से बोलना चाहिए। पाकिस्तान ईरान से संबंधों को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। पाकिस्तानी संसद ने यमन संघर्ष में सऊदी और ईरान के बीच किसी का भी पक्ष नहीं लेने का प्रस्ताव पास किया था। ईरान को याद रखना चाहिए कि हमने दोनों देशों के बीच सेतु बनाने की कोशिश की है, लेकिन 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान पाक के प्रति कभी उदार नहीं रहा है।
पाकिस्तान का बढ़ता विरोध
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी भूमिका को ईरान न केवल संदेह के नजरिये से देख रहा है बल्कि काबुल में भी लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए सड़कों पर उतरे हैं। इनके खिलाफ तालिबान हवाई फायरिंग कर चुका है। अफगानिस्तान के हजारात इलाके में तालिबान के खिलाफ जबरदस्त विरोध है जहां हजारा समुदाय बहुतायत में है। देश में हजारा शिया समुदाय अल्पसंख्यक है।