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नए आईटी नियम: मानवाधिकार परिषद की चिंताओं का भारत ने दिया जवाब, कहा-यूजर्स को सशक्त बनाना है मकसद 

Sun, 20 Jun 2021 03:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी जिनेवा, एएनआई

सार

देश की नई आईटी पॉलिसी को लेकर जिनेवा स्थित मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया शाखा की आपत्तियों पर भारत के स्थायी मिशन ने माकूल जवाब दिया है। मिशन ने बताया कि सभी पक्षों से लंबे विचार-विमर्श के बाद इन्हें तैयार किया गया है। 
 
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विस्तार
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जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के लिए भारत के स्थायी मिशन ने नए सूचना प्रौद्योगिक नियम-2021 को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया शाखा द्वारा व्यक्त चिंताओं का जवाब दिया है। भारत ने कहा कि नए नीति-नियम 2018 में शुरू हुए सभी पक्षों के साथ व्यापक विचार विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं। इनका मकसद सोशल मीडिया के आम उपयोगकर्ताआों को सशक्त बनाना है। 

 

यूएन में भारत के मिशन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा 11 जून को सरकार को भेजे गए पत्र के लिखित जवाब में यह बातें कहीं हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर यह जानकारी दी। मिशन ने स्पष्ट किया कि नए नीति नियम 2018 में सिविल सोसायटी व अन्य पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य सोशल मीडिया के आम उपयोगकर्ताओं को ताकतवर बनाना है। 

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बता दें, भारत के नए आईटी नियम-2021 को लेकर मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया शाखा ने चिंता जताई है। इस बारे में उठाई गई आपत्तियों पर भारत ने स्पष्टीकरण दिया है। भारत सरकार ने यूएन से कहा है कि उसने सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021, बनाएं हैं। इन्हें 25 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया गया और 26 मई 2021 से लागू कर दिया गया है। 
 

सरकार ने अपने जवाब में कहा कि वह चाहती है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को शिकार हुए व्यक्ति को अपनी शिकायत करने का मंच मिलना है। इसलिए सभी सोशल मीडिया कंपनियों को इसकी व्यवस्था अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। 

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सरकार ने यूएन को बताया कि नए नियम बनाने की जरूरत इसलिए भी पड़ी कि सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इनके जरिए आतंकवादियों की भर्ती, अश्लील सामग्री का प्रसार, सौहार्दभंग करने वाले सामग्री, वित्तीय घोटालों, हिंसा व कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मामले बढ़े हैं। 

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