भारत और नेपाल के बीच एक बड़ी सहमति बनी है। दोनों देश अपनी सीमाओं में राष्ट्र विरोधी या अवैध गतिविधि को संचालित नहीं होने देने पर सहमत हो गए हैं। दोनों ने इस बात पर भी हामी भरी है कि दोनों ही देश सीमा के रास्ते घुसपैठ नहीं होने देंगे। यह निर्णय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिदेशक सुजॉय लाल थाओसेन और नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के महानिरीक्षक राजू आर्य के बीच संयुक्त समन्वय बैठक में हुआ।
इन मुद्दों पर भी हुई बात
बैठक में सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए तंत्र को मजबूत करने, समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान और भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर बातचीत हुई। इस दौरान भारत ने नेपाल से अपनी सीमा से अवैध गतिविधियों में लिप्त पाकिस्तानी और चीनी नागरिकों के प्रवेश करने की अनुमति न करने देने को कहा।
पांच राज्यों की सीमा लगती है
भारत नेपाल के साथ पांच भारतीय राज्यों सिक्किम, प. बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगती हुई 1,850 किमी से अधिक की सीमा साझा करता है। चारों ओर भूमि से घिरा हुआ नेपाल माल और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर है।
नगालैंड-अरुणाचल के 12 जिलों में AFSPA बढ़ा
केंद्र ने अफस्पा (AFSPA) को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के 12 जिलों में AFSPA 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। इसे दोनों राज्यों के पांच अन्य जिलों के कुछ हिस्सों में भी बढ़ाया गया है। दरअसल, सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 सुरक्षा बलों को बिना किसी पूर्व वारंट के अभियान चलाने और किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देता है।