स्टीफाइन सावेल ने ध्यान दिलाया है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैनिक ताकत है। अमेरिकी सैनिक दुनिया के हर हिस्से में तैनात हैं। इसलिए आतंक के खिलाफ युद्ध के दौरान उसके लिए हर क्षेत्र में सैनिक कार्रवाई करना आसान बना रहा है। कॉस्ट्स ऑफ वॉर प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक इस युद्ध के दौरान लाखों आम लोगों और हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान गई। इसकी वजह से तीन करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। ये युद्ध दो दशक से चल रहा है, जिस पर 6.4 ट्रिलियन डॉलर की रकम खर्च हुई है।
यूएसए टुडे के मुताबिक कई अमेरिकी सैनिक विशेषज्ञों का दावा है कि आतंक के खिलाफ युद्ध की जो कीमत चुकाई गई, उससे हुए फायदे उसकी तुलना में कहीं ज्यादा हैं। जबकि दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि इस युद्ध ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक इस बीच युद्ध का चरित्र बदल गया है। अब साइबर हमले ज्यादा बड़ा खतरा बन गए हैं, जबकि अमेरिका इससे अपनी रक्षा के लिए अभी तैयार नहीं है।
आतंक के खिलाफ युद्ध के विरोधी विश्लेषकों की दलील है कि अब अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा विदेशी दहशतगर्द नहीं, बल्कि घरेलू चरमपंथी हैं। ये बात पिछले साल अक्टूबर में अमेरिकी गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भी स्वीकार की गई थी। इसके अलावा कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन अमेरिकावासियों के लिए ज्यादा बड़ी चुनौती बन गए हैं। कॉस्ट्स ऑफ वॉर की रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि इन खतरों की अनदेखी करते हुए अमेरिका अभी भी हर साल साढ़े सात अरब डॉलर से ज्यादा रकम सेना पर खर्च कर रहा है।