मैतई समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाली मणिपुर की एकता के लिए समन्वयक समिति (सीओसीओएमआई) ने एक बयान में कहा कि उनके प्रतिनिधियों ने गुरुवार को राजनाथ सिंह से दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उन्होंने दावा किया कि कुकी समूहों ने मणिपुर संकट के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क करके सरकार को शर्मिंदा किया। बयान में कहा गया है कि उन्होंने रक्षामंत्री के समक्ष नार्को-आतंकवाद, अवैध प्रवासी और उनकी पहचान के साथ-साथ ऑपरेशन समझौते के निलंबन के मुद्दों को भी उठाया।
दूसरी ओर, कुकी समूह राज्य पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। पिछले महीने राज्य के 10 कुकी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य से असम राइफल्स को वापस न बुलाने की अपील करते हुए कहा था कि इससे आदिवासियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
मणिपुर में तीन मई को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से अब तक करीब 175 लोग मारे जा चुके हैं और 1,100 लोग घायल हुए हैं। हिंसक झड़पें तब शुरू हुईं थीं जब बहुसंख्यक मैतई समुदाय की अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था।