आतंकियों के सामने घुटने टेकने को मजबूर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने अब कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के 54 और सदस्यों को आतंकी सूची से हटा दिया है। इससे पहले संगठन के प्रमुख साद रिजवी का नाम आतंकी सूची से हटाया गया था। रिजवी जल्द ही कोट लखपत जेल से रिहा होने वाला है।
टीएलपी के हिंसक आंदोलन से घबराकर इमरान खान सरकार ने उससे समझौता कर लिया था। इसके बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने टीएलपी के मुखिया साद रिजवी का नाम आतंकियों की सूची से हटा दिया था। अब पंजाब के गृह विभाग ने संगठन के 54 सदस्यों के नाम भी आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 की चौथी अनुसूची से हटा दिए हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आतंकियों में से 28 रावलपिंडी जिले के, 14 चकवाल के, 11 अटोक के हैं। बुधवार को टीएलपी के प्रमुख साद रिजवी का नाम आतंकियों की सूची से हटाया गया था। रिजवी को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उसे कोट लखपत जेल से जल्द रिहा किया जाएगा।
सैकड़ों मौतों का जिम्मेदार है टीएलपी
रिजवी की रिहाई व अन्य मांगों को लेकर बीते दिनों टीएलपी समर्थकों ने लाहौर इस्लामाबाद हाईवे पर डेरा जमाकर हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। बढ़ते हिंसक प्रदर्शनों से डरी इमरान सरकार ने सैकड़ों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार प्रतिबंधित संगठन से गुप्त समझौता कर लिया था। इसी समझौते के तहत टीएलपी सदस्यों के नाम आतंकी सूची से हटाए जा रहे हैं। अब तक टीएलपी के दो हजार से ज्यादा सदस्यों को रिहा किया जा चुका है।
निगरानी सूची में नाम होने पर ये हैं प्रतिबंध
आतंकवाद रोधी अधिनियम 1997 के अनुसार जिन आतंकियों के नामों को चौथी अनुसूची में रखा गया है, वे अपने स्थायी निवास को छोड़ने और लौटने से पहले पुलिस को सूचित करने के लिए बाध्य हैं। इस निगरानी सूची में रखा गया कोई भी शख्स देश नहीं छोड़ सकता है क्योंकि उसका नाम निकास नियंत्रण सूची (ईसीएल) में भी दर्ज कर लिया जाता है।
फ्रांस विरोधी प्रदर्शन के बाद लगाई थी पाबंदी
पाकिस्तान में अप्रैल माह में फ्रांस विरोधी प्रदर्शनों के बाद इमरान सरकार ने टीएलपी पर प्रतिबंध लगाया था। कट्टरपंथी संगठन के समर्थक पैगंबर मुहम्मद के कैरिकेचर को लेकर फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे थे। रिजवी पर आतंकवाद, हत्या, हत्या के प्रयास, लोगों को भड़काने और अन्य जघन्य अपराधों के 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पिछले दिनों हुए टीएलपी के हिंसक प्रदर्शनों में दर्जनों पुलिसकर्मी मारे गए थे।