पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
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जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि चुनाव आयोग ने पंजाब प्रांत में चुनावी विवादों को निपटाने के लिए लाहौर हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त चुनाव न्यायाधिकरणों को बदलने का प्रयास किया। यह सरासर गलत है। पार्टी के नेता सलमान अकरम राजा ने कहा कि पंजाब में नियुक्त चुनाव न्यायाधिकरणों को काम करने की अनुमति नहीं दी गई। जबकि अन्य प्रांतों में चुनाव न्यायाधिकरण मुख्य न्यायाधीशों द्वारा दी गई सूची के अनुसार काम करते हैं।
चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए राजा ने कहा कि पाकिस्तान के लोग आठ फरवरी को हुए आम चुनावों को भूल नहीं सकते हैं। इसमें सबसे ज्यादा धांधली की गई। उन्होंने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को जनादेश चोर कहा।
राजा ने कहा कि सरकार को पंजाब में सबसे ज्यादा डर लगता है। अगर एलएचसी के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायाधिकरण विवादों की सुनवाई करेंगे तो कई खुलासे होंगे। उन्होंने कहा कि जो संस्थाओं और लोगों के बीच मतभेद पैदा करता है, वह पाकिस्तान का दुश्मन है। पीटीआई नेता मेहर बानो क़ुरैशी ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत महिलाओं के प्रतिनिधित्व में निहित है। अफसोस है कि केवल तीन महिला नेता संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
दरअसल राजा ने पंजाब में चुनाव न्यायाधिकरणों को कार्यात्मक बनाने की मांग करते हुए पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय में एक समीक्षा याचिका दायर की थी। चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में आठ चुनाव न्यायाधिकरणों की नियुक्ति के संबंध में एलएचसी के फैसले और उसकी अधिसूचना को निलंबित कर दिया था। अब पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय पीठ एलएचसी के फैसले को लेकर सुनवाई करेगी। साथ ही चुनाव आयोग की अपील पर भी विचार करेगी।
पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो की पीपीपी ने व्यक्तिगत रूप से इमरान खान की पीटीआई से 92 से कम सीटें जीतीं। दोनों पार्टियों ने चार अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया। इससे खान की पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं मिला।