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कोरोना वायरस का असर: महामारी ने बेनकाब कर दिया है अमेरिका में मौजूद नस्लीय विषमता को

Tue, 05 Oct 2021 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

शोधकर्ताओं ने कहा है कि अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के कारण ब्लैक और मूलवासी समूहों के लोग हर स्थिति में नुकसान में रहते हैं। दूसरे रोगों की वजह से भी उनकी ही ज्यादा मौत होती है। ऐसा ही कोरोना महामारी की वजह से भी हुआ है...
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अमेरिका में कोरोना - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका में कोरोना महामारी आने के बाद से ही ये शिकायत रही है कि इस संक्रामक रोग का सबसे खराब असर ब्लैक, लातीनो और मूलवासी अमेरिकियों पर पड़ रहा है। अब इस बात की एक अध्ययन से पुष्टि हो गई है। आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि श्वेत अमेरिकियों की तुलना में ब्लैक और मूलवासी अमेरिकियों पर महामारी का कहीं ज्यादा खराब असर हुआ।

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शोधकर्ताओं ने कहा है कि अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के कारण ब्लैक और मूलवासी समूहों के लोग हर स्थिति में नुकसान में रहते हैं। दूसरे रोगों की वजह से भी उनकी ही ज्यादा मौत होती है। ऐसा ही कोरोना महामारी की वजह से भी हुआ है। ये अध्ययन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट ने कराया। अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया- ‘मार्च से दिसंबर 2020 के बीच तकरीबन 28 लाख 80 हजार मौतें अमेरिका में हुईं। 2019 की इसी अवधि से तुलना की जाए, तो कुल 4,77,200 अधिक मौतें 2020 के इन दस महीनों में दर्ज की गईं। जो अधिक मौतें हुईं, उनमें 74 फीसदी का कारण कोविड-19 को बताया गया है।’

ये रिपोर्ट अनाल्स ऑफ इंटरनल मेडिसीन नाम के जर्नल में छपी है। इसमें अलग-अलग सामाजिक वर्गों, उम्र वर्गों, आदि में हुई अधिक मौतों और उनके कारणों का विश्लेषण किया गया है। इससे सामने आया है कि प्रति एक लाख अतिरिक्त मौतों में ब्लैक, मूलवासी और लातीनो (लैटिन अमेरिकी मूल के) अमेरिकियों की मृत्यु दर श्वेत अमेरिकियों की तुलना में दो गुना रही है। इस दौरान जो अतिरिक्त मौतें बिना कोविड-19 से संक्रमित हुए हुईं, उनमें भी ब्लैक, मूलवासी और लातीनो अमेरिकियों की संख्या श्वेत अमेरिकियों से ज्यादा है। ये मौतें संभवतः लॉकडाउन के दौरान सही इलाज ना मिल पाने या इसके आर्थिक प्रभावों के कारण हुईं।

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सामने यह आया है कि 2020 में मार्च से दिसंबर के बीच अमेरिका में डायबिटीज, हृदय रोग, पक्षाघात, अल्झाइमर आदि जैसे रोगों के कारण भी ज्यादा मौतें हुईं। इनमें भी ब्लैक, मूलवासी और लातीनो अमेरिकियों की संख्या ज्यादा रही। अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि इन मौतों ने अमेरिका में नस्लीय/जातीय गैर-बराबरियों को न सिर्फ ज्यादा उजागर कर दिया है, बल्कि बीमारी और मौत के कारण ये गैर-बराबरियां और अधिक बढ़ भी गई हैं।

अध्ययनकर्ताओं ने जांच के लिए अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और सेंसस ब्यूरो से जारी मृत्यु प्रमाण पत्रों को आधार बनाया। उन्होंने कहा है महामारी काल में हुई कुल हुई अतिरिक्त मौतों के बजाय सिर्फ कोविड-19 से हुई मौतों पर गौर किया जाए, तो उससे गलत तस्वीर सामने आएगी। उस हाल में महामारी के हुए कुल असर को समझना मुश्किल बना रहेगा। अध्ययन का नेतृत्व मेरेडिथ शील्स ने किया। उन्होंन टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हमारे अध्ययन से सामने आए आंकड़े लंबे समय से जारी गैर-बराबरी के गहरे असर पर रोशनी डालते हैँ।’

शील्स ने कहा- ‘महामारी के दौरान इलाज कराने में लोग डर महसूस करते हैं। इस कारण दूसरी बीमारियों से ज्यादा मौतें हुईं। या यह भी हो सकता है कि कोविड-19 के कारण हुई मौतों को भी दूसरी बीमारी से हुई मौत बता दिया गया हो। इसी कारण गैर-कोविड मौतें भी ज्यादा हुईँ।’
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