अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को कर्ज की अगली किस्तों के रूप में सात बिलियन डॉलर देने पर राजी हो गया है, लेकिन इसके साथ ही उसने पाकिस्तान पर बेहद सख्त शर्तें थोप दी हैं। गुरुवार को आईएमएफ ने अपने बयान में दो टूक कहा कि पाकिस्तान को ‘अतिरिक्त कदम उठाने होंगे’। पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार पर अपने बजट को सकल घरेलू उत्पाद के 0.2 फीसदी के बराबर (153 अरब रुपये) लाभ में लाने की शर्त लगाई थी। अब उसने यह लक्ष्य बढ़ा कर 0.4 फीसदी कर दिया है।
पाकिस्तान सरकार ने कुछ समय वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पहले पेश 0.2 फीसदी बजट लाभ का बजट पेश किया था। अब आईएमएफ ने कहा है कि इस बजट को 0.4 फीसदी लाभ में रखना कर्ज कार्यक्रम को जारी रखने के लिए एक निर्णायक पहलू होगा। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान सरकार को सब्सिडी में और कटौती करनी होगी और टैक्स का और ज्यादा बोझ जनता पर डालना होगा।
आईएमएफ ने कहा है कि पाकिस्तान सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए वचनबद्ध है। जिन सुधारों का उसने वादा किया है, उनमें बिजली शुल्क संबंधी सुधार भी हैं। पाकिस्तान में बिजली सेक्टर पर कर्ज इस साल बढ़ कर 850 अरब रुपये हो जाने की संभावना है। आईएमएफ ने कहा है कि यह उसकी तरफ से तय सीमा से ज्यादा है। यानी पाकिस्तान को कर्ज घटना होगा। इन बातों का मतलब यह समझा गया है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में बिजली की दरें और बढ़ेंगी। सिर्फ बिजली महंगी करके ही पाकिस्तान इस सेक्टर पर चढ़े कर्ज को घटा सकता है।
आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक पाकिस्तान को भ्रष्टाचार कम करने के उपाय करने होंगे। आईएमएफ के मुताबिक भ्रष्टाचार कम करने से जो रकम बचेगी, उसे पाकिस्तान को गरीबी हटाने के कार्यक्रमों और लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने पर खर्च करना चाहिए। आईएमएफ के मुताबिक पाकिस्तान ने संपत्ति घोषणा की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली अपनाने को तैयार हुआ है, जिससे भ्रष्टाचार निवारक संस्थाओं की धार बढ़ेगी। साथ ही उससे भ्रष्टाचार संबंधी मुकदमों की जांच में भी मदद मिलेगी।
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गहरे दबाव में है। ऐसे में आईएमएफ से कर्ज हासिल करना उसके लिए अनिवार्य हो गया है। अगर कर्ज की किस्तें उसे नहीं मिलेंगी, तो उसके डिफॉल्टर हो जाने का पूरा खतरा है। आईएमएफ की रकम मिलने से पाकिस्तान फिलहाल इस खतरे को टाल सकेगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आईएमएफ का कर्ज सिर्फ फौरी राहत है। इससे पाकिस्तान अभी डिफॉल्टर होने से बच जाएगा, लेकिन विदेशी मुद्रा आने का स्थायी स्रोत नहीं बना, तो आगे ऐसा होने की आशंका बनी रहेगी।
विश्लेषकों के मुताबिक शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार ने आईएमएफ की जो शर्तें स्वीकार की हैं, उससे उसके राजनीतिक समर्थन में और गिरावट आ सकती है। बिजली की महंगाई की नई मार पाकिस्तान के उपभोक्ताओं पर पड़ेगी। देश में पहले ही डेढ़ महीने के अंदर पेट्रोल के दाम लगभग 110 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। उसकी वजह से कुल महंगाई बढ़ी है। इससे जनता में असंतोष बढ़ने के साफ संकेत मिल रहे हैं।