संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों, खासतौर पर चीन को लताड़ते हुए कहा कि इस निकाय में भारत की स्थायी उपस्थिति के बिना न्यायसंगत और समावेशी दुनिया बनाना संभव नहीं है। सुरक्षा परिषद सुधार और भविष्य के दृष्टिकोण पर अंतर-सरकारी वार्ता को संबोधित करते हुए कंबोज ने शनिवार को कहा कि सुरक्षा परिषद में साहसिक दृष्टिकोण के साथ सुधारों की जरूरत है।
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में अब भी पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। जबकि, भारत समेत दुनिया के कई देशों की लंबे समय से यह मांग रही है कि सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र के तमाम निकायों को बदले हुए वक्त और हालात के मुताबिक सुधारा जाना चाहिए। लेकिन, कुछ सदस्य देशों की मनमानी की वजह से ये सुधार संभव नहीं हो पा रहे हैं। कंबोज ने कहा, बीते कई दशकों में बड़े बदलाव हुए हैं। दुनिया में भारत, जर्मनी और जापान जैसी कई नई ताकतें उभरी हैं, जबकि फ्रांस तथा ब्रिटेन जैसे देशों का पतन हुआ है। इस तरह की स्थिति में भी भारत की मांग को दशकों से अनसुना किया जा रहा है। कंबोज ने सभी स्थायी देशों को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर कब तक 5 स्थायी देश 188 देशों की सामूहिक इच्छा की अवहेलना करते रहेंगे। इसे अब बदलना ही होगा।
सुधारों से गुजरना आवश्यक
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ पर कहा था कि प्रासंगिक बने रहने के लिए संयुक्त राष्ट्र को सुधारों से गुजरना होगा। उन्होंने कहा, आज हम एक-दूसरे से जुड़ी हुई दुनिया में रहते हैं, जहां एक ऐसे बहुपक्षीय मंच की जरूरत है, जो आज की हकीकत को दर्शाए और सभी हितधारकों को आवाज उठाने का मौका दे। व्यापक सुधारों के बिना पुराने ढांचे के साथ आज की चुनौतियों का मुकाबला नहीं हो सकता।