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अब गर्मी सिर्फ बढ़ नहीं रही, जल्दी भी आ रही: रिपोर्ट में हुआ खुलासा, भारत में बसंत से ही बढ़ रही तपिश

Sat, 26 Sep 2026 07:06 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

45 वर्षों के वैश्विक जलवायु आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि दुनिया के करीब आधे भू-भाग में चरम गर्मी का दौर लंबा हुआ है। उत्तर-पश्चिमी भारत में अत्यधिक गर्म दिनों की शुरुआत गर्मी के सामान्य मौसम से पहले हो रही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन का असर अब सिर्फ तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्मी के मौसम का कैलेंडर भी बदल रहा है। 45 वर्षों के वैश्विक जलवायु आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि दुनिया के करीब आधे भू-भाग में चरम गर्मी का दौर पहले की तुलना में लंबा हुआ है। उत्तर-पश्चिमी भारत में यह बदलाव खास तौर पर गर्मी शुरू होने से पहले दिखाई दे रहा है। यानी मौसम के सामान्य रूप से गर्म होने से पहले ही अत्यधिक गर्म दिनों की शुरुआत हो रही है। इससे लोगों को गर्मी के अनुकूल होने का कम समय मिल रहा है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

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सिर्फ औसत तापमान बढ़ना वजह नहीं
शोधकर्ताओं ने यह भी जांचा कि औसत तापमान में वृद्धि अकेले चरम गर्मी के मौसम में बदलाव को कितना समझा सकती है। विश्लेषण में पाया गया कि गर्मी के मौसम के बीच में होने वाले कुछ बदलावों को इससे समझाया जा सकता है, लेकिन मौसम की शुरुआत और अंत में हुए बदलावों की पूरी व्याख्या केवल बढ़ते औसत तापमान से नहीं होती। करीब 80 फीसदी वैश्विक भू-भाग में चरम गर्मी के समय में बदलाव इस सरल गणना से मेल नहीं खाता। शोधकर्ताओं के अनुसार क्षेत्रीय बारिश के पैटर्न में बदलाव, भूमि उपयोग में परिवर्तन और बड़े पैमाने पर बदल रही मौसम प्रणालियां भी चरम गर्मी के मौसम को प्रभावित कर सकती हैं।

48 फीसदी क्षेत्र में नमी वाली चरम गर्मी का दौर
अमेरिका के नासा गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी समेत संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 1980-1989 और 2015-2024 के आंकड़ों की तुलना की। शोधकर्ताओं के अनुसार करीब 50 फीसदी भू-भाग में सूखी चरम गर्मी का मौसम और 48 फीसदी क्षेत्र में नमी वाली चरम गर्मी का दौर बढ़ा है। यह अध्ययन जर्नल एजीयू एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है।
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हर क्षेत्र में गर्मी बढ़ने का तरीका अलग
हर क्षेत्र में गर्मी के विस्तार का तरीका एक जैसा नहीं है। कुछ इलाकों में चरम गर्मी गर्मियों के बाद शरद ऋतु की ओर बढ़ी, जबकि पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका और उत्तर-पश्चिमी भारत में इसका विस्तार मुख्य रूप से बसंत की ओर हुआ।

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