ट्रंप प्रशासन ने एच-1 बी समेत रोजगार आधारित अन्य वीजा कार्यक्रमों में दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के एक शीर्ष अधिकारी जोसेफ एडलो ने सांसदों को यह जानकारी दी। एच-1 बी भारत के प्रौद्योगिकी पेशेवरों के बीच बेहद लोकप्रिय वर्क वीजा है।
आव्रजन सेवा नीति के उपनिदेशक जोसेफ एडलो ने संसद की सुनवाई के दौरान कहा कि यूएससीआईएस ने अमेरिकी कर्मचारियों एवं कारोबारों के आर्थिक हितों को संरक्षित रखने के लिए कुछ बदलाव किए हैं। इसके तहत रोजगार आधारित वीजा कार्यक्रमों में दुरुपयोग व फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नियमों, नीति ज्ञापन और प्रक्रिया संबंधी बदलाव लागू किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख एक शुल्क सुनिश्चित करना है जो एच-1 बी आवेदकों को देना होगा।
यह अंतत: अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में मदद करेगा। अन्य कदमों में उन लाभार्थियों के चयन की संभावना बढ़ाने के लिए एच-1 बी चयन प्रक्रिया को बदला गया है जिन्होंने किसी अमेरिकी संस्थान से मास्टर या उच्च डिग्री हासिल की है। साथ ही नियोक्ताओं द्वारा फर्जीवाड़े का पता लगाने और इसकी आशंका को खत्म करने के लिए न्याय मंत्रालय के साथ सहयोग बढ़ाना भी शामिल है।