मध्य पूर्व का क्षेत्र एक बड़े संकट की तरफ कदम बढ़ाने लगा है। जानकार इस क्षेत्र को आने वाले वक्त में एक खतरनाक दौर से गुजरता हुआ देख रहे हैं। कथित इस्लामिक स्टेट के धीरे-धीरे समाप्ति की राह पकड़ने के बाद, अब सऊदी अरब और ईरान एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और यही संकट पूरे मध्यपूर्व क्षेत्र को घेरने के लिए तैयार दिख रहा है। सऊदी और ईरान के बीच संघर्ष में लेबनान केंद्र बिंदु बना हुआ है।
यहां के प्रधानमंत्री साद हरीरी ने कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब दौरे के बीच में अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे का असर पूरे क्षेत्र में दिखाई पड़ रहा है। लेबनान के अधिकतर नागरिकों का मानना है कि हरीरी ने सऊदी के दबाव में आकर इस्तीफा दिया है।
सऊदी-ईरान का संघर्ष
फिलहाल तो यह भी जानकारी नहीं है कि हरीरी कब तक लेबनान लौटेंगे। हालांकि लेबनानी राष्ट्रपति मिशेल आउन और अन्य वरिष्ठ राजनेताओं ने उनसे वापस आने की अपील की है।
लेबनान में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हरीरी को सऊदी अरब में नजरबंद कर रखा है और उनसे जबरन इस्तीफा दिलवाया गया है। आउन ने अभी तक हरीरी का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है।
हरीरी ने टीवी पर अपने इस्तीफे की घोषणा करने के बाद से सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोला है। इस पूरे घटनाक्रम को सुन्नी नेतृत्व वाले सऊदी अरब और शिया प्रभुत्व वाले ईरान के बीच जारी संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है।
ताकतवर हिज्बुल्ला शिया आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जोकि लेबनान और इस इलाके में तनाव बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराता रहा है। लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री और हरीरी के पिता रफीक अल-हरीरी की हत्या 2005 में एक कार बम धमाके में हुई थी, इस धमाके के लिए हिज्बुल्ला को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।
ये भी पढ़ेंः क्यों टकरा रहे हैं शिया और सुन्नी मुसलमान?
हिज्बुल्ला की ताकत
शिया समुदाय के प्रमुख नेता हसन नसरल्लाह ने शुक्रवार को कहा था कि सऊदी अरब ने लेबनान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है। हिज्बुल्ला पर आरोप हैं कि उसने लेबनान के अंदर अपना एक अलग राज्य स्थापित कर दिया है।
हिज्बुल्ला की सेना लेनबानी सेना से ज्यादा ताकतवर है और उसके नेताओं का वहां की कैबिनेट पर खासा असर है। गुरुवार को सऊदी अरब और उसके सहयोगी खाड़ी देशों ने लेबनान के नागरिकों को अपना इलाका छोड़कर चले जाने की बात कही, इसके बाद लेबनान समेत पूरे इलाके में तनाव पैदा हो गया।
हिज्बुल्ला के समाचार पत्र अल अखबर के संपादक हसन इलीक कहते हैं, "अमरीका, इसराइल और सऊदी मिलकर हिज्बुल्ला को सीरिया और इराक में फायदा उठाने से रोकना चाहते हैं।" ये माना जाता है कि बशर अल-असद को सत्ता में बनाए रखने के लिए ईरान और हिज्बुल्ला की सेनाओं का समर्थन जरूरी है।