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ग्रेटा थनबर्ग ने नासा के मंगल मिशन को लेकर कसा तंज, जारी किया पर्यटन विज्ञापन

Thu, 18 Feb 2021 10:34 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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ग्रेटा थनबर्ग (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर' ने नासा  के मंगल मिशन को लेकर तंज कसा। 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर' ने एक व्यंग्यपूर्ण पर्यटन विज्ञापन जारी किया है, जिसे धरती पर रहने वाले लोगों के लिए 'वेक-अप कॉल' बताया गया है।

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विज्ञापन का नाम 'वन प्रतिशत' (1%) रखा गया है, जिसे 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर'ने गुरुवार सुबह नासा के रोवर के मंगल पर उतरने के मौके पर जारी किया। वीडियो में तस्वीरों के साथ एक वॉइसओवर चल रहा है। इसमें मंगल ग्रह को नई दुनिया शुरू करने का स्थान बताया गया है। मंगल को ऐसा स्थान बताया गया है कि कोई युद्ध नहीं, कोई आपराधिकता, कोई महामारी नहीं और कोई प्रदूषण नहीं है। विज्ञापन वीडियो के अंत में कहा गया है कि हम इस धरती पर रहने वाले 99 प्रतिशत उनके लिए जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए काम करेंगें।

बता दें कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की 10 साल की मेहनत गुरुवार को सबसे कड़ी परीक्षा का सामना करने वाली है। मंगल पर जीवन की खोज के लिए गया पर्सविरन्स रोवर लाल ग्रह सतह पर लैंडिंग की कोशिश करेगा। इसे पिछले साल धरती पर कोरोना वायरस की महामारी के बीच जुलाई में लॉन्च किया गया था और यह मिशन अब तक का सबसे अडवांस्ड रोबॉटिक एक्सप्लोरर है। 29.25 करोड़ मील की दूरी तय करके मंगल पर पहुंचने वाला पर्सविरन्स वहां जीवन के निशान खोजेगा।
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 भारत में जारी किसान आंदोलन का समर्थन करने के बाद से ग्रेटा थनबर्ग लगाचार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। नए कृषि कानूनों के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली में करीब दो माह से जारी किसान आंदोलन के समर्थन में पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने एक भारत विरोधी योजना वाली टूलकिट साझा करते हुए ट्वीट किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। साथ ही ग्रेटा का साथ देने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु पर कार्रवाई की

क्या है टूलकिट मामला 
बता दें कि किसान आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए थनबर्ग ने एक भारत विरोधी दस्तावेज (टूलकिट) साझा किया था। इस दस्तावेज में ‘ट्विटर स्टॉर्म’ बनाने और भारतीय दूतावासों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने सहित भारत की छवि खराब करने संंबंधी कई योजनाएं सूचीबद्ध की गई थीं, जो किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए बनाई गई थीं।

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