वैश्विक दक्षिण का मतलब मानसिकता, एकजुटता और आत्मनिर्भरता
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) एक मानसिकता है। यह एक तरह से एकजुटता और आत्मनिर्भरता है। 'भारत और वैश्विक दक्षिण' को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा, आज का वैश्विक एजेंडा पुनर्संतुलन और बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देना है। जिससे दुनिया अपनी कुदरती विविधता को जारी रख सके। जयशंकर ने कहा कि अर्थव्यवस्था के केंद्रीकरण से वर्चस्व की समकालीन चुनौतियां पैदा होती हैं। वैश्विक दक्षिण मानसिकता, एकजुटता और आत्मनिर्भरता के बारे है।
अमेरिका के तीन वर्ष का कैशलेस लेनदेन भारत एक माह में करता है...
युगांडा से नाइजीरिया पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अमेरिका जितना कैशलेस लेनदेन तीन वर्ष में करता है, उतना भारत एक माह में करता है। भारतीय समुदाय से चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा, प्रत्येक भारतीय नागरिक का जीवन आसान हो गया है और इसका कारण यह है कि हमने प्रौद्योगिकी को बहुत गहराई से अपनाया है।
भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था
जयशंकर ने कहा, आज हम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। आज, यदि आप भारत में आर्थिक गतिविधि देखते हैं, हर जगह कुछ न कुछ बन रहा है। मेट्रो बन रही है, सड़क बन रही है, नए हवाई अड्डे बन रहे हैं, नई रेलगाड़ियां आ रही हैं, रेलवे स्टेशन बन रहे हैं। गांवों में पाइप से पानी आ रहा है, बिजली कनेक्शन आ रहा है। विदेश मंत्री ने भारत के कोविड-19 से निपटने के तरीके की भी सराहना की।