थिसेनक्रुप के एक अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा 214 एक मानक डिजाइन वाली पनडुब्बी है। इसे भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ बदलाव की आवश्यकता होगी।
पाकिस्तान और चीन का मुकाबला करने के लिए जर्मनी ने भारतीय नौसेना को एचडीडब्ल्यू श्रेणी की उन्नत वैरिएंट की पनडुब्बी देने की पेशकश की है। इसे भारत में शिशुमार श्रेणी के नाम से जाना जाता है। अभी तक भारतीय नौसेना के बेड़े में इसके पुराने वैरिएंट ही मौजूद हैं। जर्मनी की थिसेनक्रुप एजी कंपनी इसे बनाती है। इसकी कुल लागत 4.8 अरब डॉलर है। एचडीडब्ल्यू पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है, जो 72 मीटर लंबी होती हैं। नई पनडुब्बी कई तरह से घातक हथियारों और तकनीक से लैस है।
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भारत के लिए बदलाव को तैयार
थिसेनक्रुप के एक अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा 214 एक मानक डिजाइन वाली पनडुब्बी है। इसे भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ बदलाव की आवश्यकता होगी। टाइप 209 जो भारत को 80 के दशक के मध्य में जर्मनी से मिली थी और इसमें से दो का निर्माण भारत में किया गया था, उनमें भी भारत के मुताबिक बदलाव किया गया।
12 एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू जेट खरीद के टेंडर
भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 12 आधुनिक एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू जेट खरीद के लिए टेंडर जारी किए हैं। इससे वायुसेना अपनी स्क्वाड्रन क्षमता बढ़ा सकेगी, उसकी मारक क्षमता में इजाफा होगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार यह जेट भारत में ही बनेंगे, इसके लिए रूसी मूल उपकरण उत्पादकों से भी साझेदारी होगी। वहीं सरकारी कंपनी एचएएल इस टेंडर पर अगले महीने तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व अन्य जानकारी देगी। सूत्रों के अनुसार यह एसयू-30 एमकेआई विमान न केवल अत्याधुनिक होंगे, बल्कि इनमें कई भारतीय हथियार व सेंसर भी लगे होंगे। भारतीय उपकरण इनका बड़ा हिस्सा होंगे।