ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक संभावित चुनाव नतीजों को लेकर अनिश्चय कायम रहने से निवेशक आशंकित हैं। जर्मनी यूरोपियन यूनियन के भीतर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहां कैसी सरकार बनेगी और वह किन नीतियों पर चलेगी, इसे लेकर पूरे यूरोप में गहरी दिलचस्पी रहती है। निवेशकों का कहना है कि अगर एसपीडी के नेतृत्व में सरकार बनी, तो वामपंथ की तरफ झुकाव वाली नीतियां अपनाएगी। उसके शासनकाल में सरकारी खर्च बढ़ेगा, जिसका असर जर्मनी की राजकोषीय स्थिति पर पड़ेगा। जबकि अंगेला मैर्केल के 16 साल के चांसलर काल में जोर सरकारी कर्ज घटाने पर रहा।
इनसाइट इन्वेस्टमेंट नाम की संस्था के अधिकारी गैरेथ कोलस्मिथ ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘मेरी राय है कि चुनाव के बाद जर्मनी में राजनीतिक बदलाव आएगा। बाजार के नजरिए से इससे बदलाव से जुड़े सवाल बहुत अहम हैं।’
विश्लेषकों के मुताबिक अगर एसपीडी सबसे बड़ी पार्टी रही और उसके नेतृत्व में सरकार बनी, तो असल बात यह देखने की होगी कि उस सरकार में गठबंधन सहयोगी के तौर पर कौन सी पार्टियां शामिल होती हैं। अगर एसपीडी ने फ्री डेमोक्रेट्स के साथ सरकार बनाई, तो बाजार की आशंकाएं घटेंगी। लेकिन अगर उसने डाय लिंके को साथ लिया, तो बाजार में घबराहट फैल सकती है। डाय लिंके का एजेंडा धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाना और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश है।
ग्रीन पार्टी की प्राथमिकताओं को लेकर भी आशंकाएं हैं, जो पेट्रोलियम का उपयोग खत्म करने और ग्रीन अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दे रही है। यह मान कर चला जा रहा है कि ग्रीन पार्टी संभावित गठबंधन का एक घटक जरूर होगी।