भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों
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फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्विपक्षीय बातचीत के बाद कहा कि भारत का लोकतंत्र शानदार है। हमें अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाना है। हमने अंतरिक्ष में सहयोग पर एक नया एग्रीमेंट किया है। उन्होंने कहा कि हम भारत को चंद्रयान भेजने के लिए बधाई देते हैं। हम आतंकवाद पर भी एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
मैक्रों ने कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के मुद्दे पर कहा कि पीएम मोदी ने जम्मू और कश्मीर के हालात पर मुझे बताया। यह आंतरिक मसला है। इस मसले पर कोई तीसरा हस्तक्षेप न करे। इसका हल भारत और पाकिस्तान ही निकाल सकते हैं, जिसके लिए ये भी बहुत जरूरी है कि स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा कि कहा कि मार्च 2018 में जब मैं भारत गया तो हमने व्यापार सहयोग बढ़ाने का फैसला किया था। हमने इस साल ही इसे पूरा कर लिया है। भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक व्यापार में 25 प्रतिशत बढ़ा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण का समापन मर्सीबको अबोआ कहकर किया।
जी-7 में मोदी की ट्रम्प, जॉनसन, आबे, मर्केल से द्विपक्षीय बातचीत भी संभव
जी-7 समिट में मोदी पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सहयोग और डिजिटल परिवर्तन जैसे मुद्दों पर विचार रख सकते हैं। जी-7 के अलावा मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन, जर्मनी चांसलर अंगेला मर्केल, जापानी पीएम से शिंजो आबे से बातचीत की संभावना है। मोदी इस दौरे के दौरान तीसरी बार यूएई और पहली बार बहरीन भी जाएंगे।
रक्षा: भारत को रक्षा साजो-सामान देेने वाला फ्रांस चौथा सबसे बड़ा देश
फ्रांस रक्षा क्षेत्र में भारत का सबसे अहम मित्र है। स्ट्रेटजिक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, रूस, इजरायल, अमेरिका के बाद फ्रांस भारत को रक्षा आपूर्ति करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है। फ्रांस, भारत को स्कॉर्पियन सबमरीन्स, मिराज-2000, एंटी-शिप मिसाइल, मेटिओ, मिका, रफाल विमान आदि दे रहा है। चीन के खिलाफ अमेरिकी अगुआई वाली इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटजी में भी फ्रांस हिस्सा है।