भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान यानी G4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर एक बार फिर जोरदार आवाज उठाई है। चारों देशों ने पिछली इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस (IGN) बैठक में सुधार की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने पर कड़ी चिंता जताई। ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान डेविड वाडेफुल, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर मुलाकात की। बैठक के बाद जारी G4 के संयुक्त मंत्रिस्तरीय बयान में कहा गया कि मौजूदा समय में सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मूल जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम नहीं है।
80 साल पुरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
G4 देशों ने कहा कि सुरक्षा परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह करीब आठ दशक पुरानी व्यवस्था है, जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को सही तरीके से नहीं दर्शाती। इस पुरानी संरचना के कारण वर्तमान और भविष्य में शांति एवं सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की कोशिशें भी प्रभावित हो रही हैं। G4 मंत्रियों ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में UNSC में सुधार अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
18 साल से चल रही बातचीत, फिर भी नतीजा नहीं
G4 ने इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस यानी IGN की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। चारों देशों ने आकलन किया कि 18 साल से चल रही यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार की दिशा में कोई ठोस नतीजा देने में काफी हद तक नाकाम रही है। मंत्रियों ने पिछली IGN बैठक में भी प्रगति नहीं होने पर गहरी चिंता जताई। खास तौर पर उन्होंने इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई कि टेक्स्ट आधारित बातचीत शुरू होने से पहले ही तथाकथित 'ब्रिजिंग प्रपोजल' पेश कर दिया गया।
G4 ने 'ब्रिजिंग प्रपोजल' पर जताई आपत्ति
G4 देशों ने कहा कि इस प्रस्ताव में उन सदस्य देशों की राय को पर्याप्त जगह नहीं दी गई है, जो सुरक्षा परिषद की सदस्यता की दोनों श्रेणियों यानी स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों में विस्तार के पक्ष में हैं। चारों देशों ने यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और IGN के जनादेश के मुताबिक सुरक्षा परिषद में सुधार पर फैसले के लिए सर्वसम्मति को आधार या अनिवार्य कसौटी नहीं माना गया है। उनका कहना है कि अब आगे बढ़ने के लिए ऐसी प्रक्रिया जरूरी है, जिसमें सदस्य देशों की व्यापक राय को जगह मिले और सुधार की दिशा में वास्तविक बातचीत शुरू हो।
G4 दूसरे सुधार समर्थक देशों के साथ बनाएगा तालमेल
G4 ने कहा कि वह आगे दूसरे सुधार समर्थक समूहों के साथ मिलकर काम करेगा और उनके बीच समान मुद्दों पर तालमेल की संभावनाएं तलाशेगा। इसका मकसद ऐसा साझा मॉडल तैयार करना है, जो संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों की आवाज को सही तरीके से सामने रख सके। G4 ने कहा कि इसके बाद टेक्स्ट आधारित बातचीत शुरू करना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उसके मुताबिक यही रास्ता वास्तविक और प्रभावी UNSC सुधार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकता है। चारों देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्था की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बहाल करने तथा पूरी बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी बताया।
सिर्फ IGN तक सीमित नहीं रहेगी सुधार की चर्चा
G4 मंत्रियों ने साफ किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर बातचीत केवल IGN के मंच तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सदस्य समुदाय के साथ दूसरे मंचों पर भी बातचीत करने की इच्छा जताई है। इनमें संयुक्त राष्ट्र महासभा भी शामिल है। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान UNSC सुधार को लेकर IGN में हुई चर्चा की समीक्षा भी की। उन्होंने मौजूदा चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक माहौल का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे समय में सुरक्षा परिषद में सुधार पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों सीटों में विस्तार की मांग
G4 देशों ने कहा कि सुरक्षा परिषद में जल्द सुधार किया जाना जरूरी है, ताकि यह संस्था मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के हिसाब से प्रभावी ढंग से काम कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि UNSC की स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता का विस्तार इस सुधार का केंद्रीय हिस्सा होना चाहिए। G4 का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों का बहुमत इस रुख का समर्थन करता है। चारों देशों ने खास तौर पर अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले या अब तक पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित क्षेत्रों और समूहों को दोनों श्रेणियों में ज्यादा जगह देने की जरूरत बताई।
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अफ्रीका के लिए स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन
G4 मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद में ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व को भी एक अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि उन सदस्य देशों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के दूसरे उद्देश्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। G4 ने अफ्रीका की सुरक्षा परिषद में बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग का अपना लगातार समर्थन दोहराया। चारों देशों ने विशेष रूप से अफ्रीका के स्थायी सदस्यता की मजबूत दावेदारी का समर्थन किया और कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में बदलाव करके दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों और समूहों को अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।