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रूस की कमाई पर चोट से युद्ध रोकने की रणनीति?: जेलेंस्की बोले- उन्हें पैसा मिलता रहा तो लड़ाई लंबी चलेगी

Thu, 24 Sep 2026 03:36 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में जेलेंस्की ने रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए उसकी कमाई के स्रोतों और व्यापार पर दबाव बनाए रखने की अपील की है। वहीं रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही, लेकिन युद्धविराम को लेकर रूस की आपत्ति साफ की।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को दुनिया के नेताओं से रूस की कमाई के रास्ते बंद करने और उसकी युद्ध क्षमता पर दबाव बनाए रखने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंग्रेजी में बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा, 'रूस की कमाई को निशाना बनाए रखना होगा।' उन्होंने कहा कि जो भी रूस के साथ व्यापार के जरिए उसे पैसा देता है, वह इस युद्ध को और लंबा चलने का मौका देता है। इसी वजह से यूक्रेन रूस के साथ व्यापार सीमित करने और खुद भी रूस की कमाई के स्रोतों पर चोट करने पर जोर दे रहा है।

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शनिवार को रूस की बारी, पुतिन फिर नहीं आएंगे
संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस को शनिवार को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले कई वर्षों से इस बैठक में नहीं पहुंचे हैं और उनकी जगह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सभा को संबोधित करेंगे। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लावरोव ने कहा कि रूस टिकाऊ शांति की दिशा में बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह युद्ध को केवल कुछ समय के लिए 'रोकने' के पक्ष में नहीं है। उनका तर्क था कि युद्ध में ऐसा विराम यूक्रेन और उसके सहयोगियों को और हथियार जुटाने का समय दे देगा।

साढ़े चार साल से जारी जंग में भारी नुकसान
रूस ने यूक्रेन पर हमला किए अब साढ़े चार साल से ज्यादा समय हो चुका है। पश्चिमी विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध में 5 लाख से ज्यादा रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। यूक्रेन में भी सैन्य नुकसान 5 लाख से ज्यादा बताया गया है, जिनमें करीब 1.40 लाख तक मौतें शामिल हो सकती हैं। हालांकि, रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने-अपने सैनिकों के हताहत होने के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करते हैं, इसलिए इन आंकड़ों को अनुमान के तौर पर देखा जाता है।
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युद्ध का असर यूक्रेन और रूस से बहुत आगे तक
इस जंग का असर सिर्फ दोनों देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। ईंधन, खाद और अनाज की वैश्विक सप्लाई पर इसका असर पड़ा है। साथ ही रूस और पश्चिमी देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी खेमेबंदी बढ़ी है।

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मोर्चे पर बड़ा बदलाव नहीं, दूर से हमले तेज
पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में पिछले साल से युद्ध की अग्रिम पंक्तियों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसके बावजूद रूस और यूक्रेन ने लंबी दूरी से किए जाने वाले हमले बढ़ा दिए हैं। दोनों तरफ से ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल लगातार हो रहा है, जिससे युद्ध का एक बड़ा हिस्सा अब जमीन पर सैनिकों की हलचल के साथ-साथ दूर बैठे किए जाने वाले हमलों पर भी टिक गया है।

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