भारत और जी4 के अन्य सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में मौजूदा अंतरसरकारी बातचीत में जरूरी खुलापन नहीं है, यह त्रुटिपूर्ण कार्यशैली से जूझ रही है।
जी4 में शामिल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, ब्राजील के विदेश मंत्री अर्नेस्टो अराउजो, जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास और जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशीमित्सू ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 74वें सत्र से इतर मुलाकात की।
बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य के अनुसार जी4 के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अंतरसरकारी वार्ता (आईजीएन) में हाल ही में किए गए प्रयासों की समीक्षा की।
इसमें कहा गया, ‘उन्होंने इस तथ्य के मद्देनजर अपनी चिंता व्यक्त की कि आईजीएन शुरू होने के 10 साल से ज्यादा बाद अफ्रीकी साझा रुख बेहतर तरीके से जरूर झलका है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।’
उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि आईजीएन के हालिया सत्र में एक बार फिर यह बात प्रदर्शित हुई कि वार्ता प्रक्रिया में जरूरी खुलेपन और पारदर्शिता की कमी है और यह त्रुटिपूर्ण कार्यशैली से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकतर सदस्य सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के पक्षधर हैं तथा आईजीएन को और अधिक परिणामोन्मुखी प्रक्रिया बनाने की अपेक्षा रखते हैं। महज सामान्य वक्तव्यों पर आधारित बहसों को पीछे छोड़ने का समय आ गया है।
मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद के जल्द और व्यापक सुधार के लिए अपनी पुरजोर प्रतिबद्धता जताई। इस बारे में 2005 में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भी सरकार प्रमुखों और शासनाध्यक्षों ने विचार किया था।
बयान के अनुसार जी4 के विदेश मंत्रियों ने समकालीन वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार करने और इसकी प्रमुख नीति निर्णायक इकाइयों को उन्नत बनाने के प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।