फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को यह स्पष्ट कर दिया कि यूक्रेन के यूरोपियन यूनियन (ईयू) में शामिल होने में अभी कई दशक लगेंगे। इस बीच मैक्रों ने एक नए ‘यूरोपियन पॉलिटिकल कम्युनिटी’ के गठन का प्रस्ताव सामने रखा है।
टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि ईयू दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। उसके पास यह क्षमता है कि वह रूसी अर्थव्यवस्था का गला घोंट देने वाले कदम तुरंत उठा सकता है। लेकिन ईयू की समस्या उसका यह प्रावधान है कि ये समूह तभी कोई निर्णय लेगा, जब इसके सदस्य सभी 27 देश उस पर सहमत होंगे। जबकि इन देशों की सोच और नजरिए में भारी फर्क है। इसी कारण इस समूह के अंदर अपने आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने के तरीकों पर गंभीर बहस चल रही है।
मैक्रों अभी ईयू के अध्यक्ष भी हैं। सोमवार को स्ट्रैसबर्ग में एक विशेष सम्मेलन को संबोधित करते हुए कई महत्त्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने दो टूक कहा कि यूक्रेन को ईयू की सदस्यता तभी मिल सकती है, जब ये समूह सदस्यता देने की अपनी कसौटी को कमजोर कर दें। उनके इस बयान को इस बात का संकेत माना गया है कि मैक्रों यूक्रेन को ईयू की सदस्यता देने के खिलाफ हैं। हाल में दोबारा फ्रांस का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनमें यह बात बिना लाग-लपेट के कहने का आत्म विश्वास आ गया है। इस मुद्दे पर ईयू के भीतर मतभेद कितने गहरे हैं, इसका संकेत भी सोमवार को मिला। यूरोपियन आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि आयोग जून में यूक्रेन को सदस्यता देने के बारे में अपनी राय बता देगा।
मीडिया टिप्पणियों से साफ है कि ईयू में सुधार की मैक्रों की योजना पर भी इस समूह में गहरे मतभेद हैं। कई देश अभी ऐसी बात उठाने के बजाय रूस पर दबाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस राह में फिलहाल सबसे बड़ी बाधा हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान बने हुए हैं। उन्होंने रूस के खिलाफ किसी नए प्रतिबंध में शामिल होने से इनकार कर दिया है।