फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर 1986 में 26 साल के थे, जब देश में भड़के जन विद्रोह के कारण उनके पिता को अपने परिजनों से साथ देश से भागना पड़ा था। तब मार्कोस परिवार ने अमेरिकी राज्य हवाई में जाकर पनाह ली थी, जहां वे तीन साल रहे। दो वर्ष और विदेश में गुजारने के बाद 1991 में मार्कोस परिवार फिलीपींस लौटा था। अब उसी देश की जनता ने मार्कोस जूनियर को भारी बहुमत से देश के राष्ट्रपति पद पर बैठाने का फैसला किया है।
अस्थायी चुनाव नतीजों के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव में मार्कोस जूनियर को करीब तीन करोड़ वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और वर्तमान उप-राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो को तकरीबन एक करोड़ 40 लाख वोट मिले हैं। बताया गया है कि औपचारिक रूप से चुनाव नतीजों की पुष्टि होने में अभी कई हफ्तों का समय लग सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक बोंगबोंग नाम से मशहूर मार्कोस जूनियर दशकों से अपने परिवार पर लगे कलंक को धोने की कोशिश में जुटे हुए थे। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का जोरदार इस्तेमाल किया। सोमवार को आए चुनाव नतीजे को इस बात का संकेत माना गया है कि आखिरकार बोंगबोंग की कोशिश कामयाब हो गई है।
मार्कोस जूनियर मौजूदा राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की जगह लेंगे। दुतेर्ते की बेटी सारा दुतेर्ते अब उप राष्ट्रपति चुनी गई हैं। दुतेर्ते पर भी मीडिया और नागरिक समाज का दमन करने और मानव अधिकारों के घोर उल्लंघन के आरोप हैं। दुतेर्ते अपने आठ साल के शासनकाल में फिलीपींस को चीन के ज्यादा करीब ले गए, जबकि फिलीपींस परंपरागत रूप से अमेरिका का सहयोगी देश रहा है।
मार्कोस जूनियर का भी चीन के प्रति नरम रुख रहा है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति बनने के बाद वे अपनी नीति को नया रूप दे सकते हैं। ज्यादा संभावना इस बात की है कि वे अमेरिका और चीन दोनों से बेहतर रिश्ते रखने की कोशिश करेंगे।
चुनाव अभियान के दौरान मार्कोस जूनियर ने रोजगार से अधिक अवसर पैदा करने, महंगाई पर काबू पाने, और खेती एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने का वादा किया है। विश्लेषकों के मुताबिक विदेश नीति के साथ-साथ इन मोर्चों पर भी अब उनका कड़ा इम्तिहान होगा।