विश्लेषकों के मुताबिक ट्रंप के इसी समर्थक वर्ग को संतुष्ट करने की कोशिश में रिपब्लिकन पार्टी के शासित राज्यों में नए चुनावी नियम लागू करने वाले कानून बनाए गए हैं। आरोप है कि उनके जरिए अल्पसंख्यक और ब्लैक समुदाय के लोगों के लिए मतदान करना मुश्किल बना दिया गया है। ये तबके आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक माने जाते हैं। अपना राष्ट्रपति होने और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में बहुमत होने के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन राज्यों में बनाए गए कानूनों को पलटने का बिल पारित नहीं करा पाई है।
ताजा सामने आई जानकारी के मुताबिक ट्रंप समर्थक राजनीतिक संगठनों के पास अभी दस करोड़ 20 लाख डॉलर का कोष है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसका मतलब यह है कि अगले साल होने वाले मध्य अवधि के चुनावों में ट्रंप एक अहम भूमिका निभाएंगे। अपने धन और समर्थक तबकों के आधार पर कई राज्यों में वे चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में होंगे। ट्रंप पहले ही यह कह चुके हैं कि रिपब्लिकन पार्टी के जिन नेताओं ने पिछले राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम आने के बाद उसे रद्द कराने की कोशिश में उनका साथ नही दिया, वे उन्हें हराने की कोशिश करेंगे।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप का ताकतवर बने रहना राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। चीन और ईरान जैसे कई मसलों पर उन्हें इसी राजनीतिक स्थिति के दबाव में सख्त रुख अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस रूप में सत्ता से बाहर रह कर भी ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी और काफी हद तक देश के एजेंडे को भी अपने ढंग से प्रभावित करने में सफल बने हुए हैं।