फेसबुक के पूर्व कर्मचारी ने कंपनी पर नौकरियों और सोशल नेटवर्क पर अश्वेत लोगों को शामिल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। फेसबुक में रणनीतिक सहयोगी प्रबंधक रहे मार्क ल्यूकी ने काम के आखिरी दिन से कुछ पहले फेसबुक कर्मचारियों को एक संदेश भेजा था। उन्होंने संदेश में लिखा, ‘फेसबुक को अश्वेत लोगों से परेशानी है। अश्वेत लोगों को निकाला जाना दर्शाता है कि ऐसे कर्मचारी कंपनी में हाशिए पर हैं।’ हालांकि फेसबुक की ओर से इस मामले पर कोई जवाब नहीं आया है।
ल्यूकी ने कहा कि संख्या के आधार पर तो काफी अश्वेत लोग सोशल नेटवर्क पर हैं, लेकिन कंपनी के भीतर उनके लिए कई बाधाएं पैदा की जा रही हैं। कई बार सहयोगियों को यह कहता सुना है कि उन्हें नहीं पता था कि फेसबुक में अश्वेत लोग भी काम करते हैं। इतना ही नहीं, श्वेत लोगों की आपत्ति के चलते फेसबुक से ऐसा कंटेंट हटाया और अकाउंट निलंबित किए गए जो कंपनी की नीतियों का उल्लंघन नहीं करते। मौजूदा समय में कुल चार प्रतिशत अश्वेत लोग फेसबुक में काम करते हैं, जो 2016 में दो प्रतिशत थे।
हालांकि कार्ल स्मिथ नामक व्यक्ति ने ल्यूकी की पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि अश्वेत के तौर पर फेसबुक में उनका अनुभव इतना भी खराब नहीं है। ल्यूकी सभी अश्वेत लोगों में बात नहीं कर रहे हैं। विडंबना है कि मैंने और ल्यूकी ने एक ही दिन कंपनी ज्वाइन की थी, लेकिन मैं अब भी यहां काम कर रहा हूं।
बड़े पैमाने पर पूर्वाग्रह का शिकार हैं अश्वेत: रिपोर्ट
वियना। यूरोपियन संघ में अश्वेत लोगों को बड़े पैमाने पर पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है। बुधवार को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि आज भी उन्हें नस्लीय उत्पीड़न और हमले झेलने पड़ते हैं। यूरोपियन संघ एजेंसी फॉर फंडामेंटल राइट्स के निदेशक माइकल ओफ्लाहर्टली ने कहा, ‘पूरे यूरोपियन संघ में व्यक्ति की त्वचा के रंग पर आधारित नस्लवाद बड़ा संकट बना हुआ है।’
यह रिपोर्ट फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन समेत यूरोपीय संघ के 12 देशों के 5,800 से ज्यादा लोगों के वर्ष 2015 और 2016 में लिए साक्षात्कारों पर आधारित है। 30 फीसदी लोगों ने कहा कि सर्वे से पहले पांच वर्ष में उन्हें किसी न किसी अवसर पर नस्लीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। 5 प्रतिशत ने हिंसक हमले का सामना किया। लेकिन ऐसे मामलों में 60 फीसदी से अधिक लोगों ने अधिकारियों को उक्त घटना की जानकारी नहीं दी।