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Myanmar: म्यांमार में पूर्व ब्रिटिश राजदूत को एक साल की कैद, सजा सुनाकर सैन्य शासकों ने साधे कई निशाने

Sun, 04 Sep 2022 05:27 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

बॉवमैन 2002 से 2006 तक म्यांमार में ब्रिटिश राजदूत थीं। उन्हें और उनके पति को बीते 24 अगस्त को आव्रजन कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब से उन्हें यंगून में हिरासत में रखा गया था।
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म्यांमार में पूर्व ब्रिटिश राजदूत विकी बॉवमैन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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म्यांमार में पूर्व ब्रिटिश राजदूत विकी बॉवमैन और उनके पति को सजा सुनाए जाने को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि म्यांमार के सैनिक शासक किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं कर रहे हैं। बॉवमैन के पति हतीन लीन म्यांमार के जाने-माने कलाकार हैं। दोनों को एक साल कैद की सजा सुनाई गई है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार की सेना नियंत्रित एक अदालत के इस फैसले से ब्रिटेन के साथ म्यांमार के संबंध और तनावपूर्ण हो जाएंगे।
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बॉवमैन 2002 से 2006 तक म्यांमार में ब्रिटिश राजदूत थीं। उन्हें और उनके पति को बीते 24 अगस्त को आव्रजन कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब से उन्हें यंगून में हिरासत में रखा गया था। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने म्यांमार में अपना एक दूसरा पता भी रजिस्टर्ड कराया हुआ था। दोनों शान प्रांत स्थित कालाव में हतीन लिन के घर पर रह रहे थे। जबकि उन्होंने अपना पता यंगून के एक अपार्टमेंट का भी दर्ज करा रखा था।

गलत पता दर्ज कराने के आरोप में बॉवमैन और उनके पति को पांच साल तक कैद सुनाई जा सकती थी। लेकिन कोर्ट ने उन्हें एक साल की जेल सुनाई है। पहले बताया गया था कि दोनों पर लगे इल्जाम की सुनवाई छह सितंबर को होगी। लेकिन सैनिक शासन ने मामले को फास्ट ट्रैक करने का असामान्य फैसला कर लिया।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश नागरिकों को सजा दिए जाने के बाद म्यांमार में मौजूद विदेशी नागरिकों में भय गहरा गया है। एक व्यापारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘हमने कई स्थानीय व्यापारियों की गिरफ्तारी देखी है। बड़े अधिकारियों को यहां परेशान किया गया है और उनके देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है। लेकिन विकी बॉवमैन की गिरफ्तारी और उन्हें सजा सुनाए जाने का संदेश साफ है- यहां कोई सुरक्षित नहीं है, आपकी हैसियत चाहे जो हो, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’

बॉवमैन म्यांमार में एक जानी-मानी शख्सियत रही हैं। 2013 में उन्होंने 'म्यांमार सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिबल बिजनेस' नाम के एक एनजीओ की स्थापना की थी। ये एनजीओ ब्रिटेन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क और नीदरलैंड्स की कई संस्थाओं से प्राप्त धन से चलता है। बॉवमैन अक्सर व्यापार से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय जताती रही हैं। बर्मी भाषा वे धाराप्रवाह ढंग से बोलती हैं। उनके पति म्यांमार में पहले भी राजनीतिक बंदी रह चुके हैं। वे देश के जाने-माने कलाकारों में से एक हैं। म्यांमार में चल रहे लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में भी वे भागीदारी करते रहे हैं।

एक दूसरे विदेशी व्यापारी ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘सैनिक शासक जो संदेश देना चाहते हैं, उसके लिए विकी बॉवमैन को निशाना बनाना उनका वाजिब चयन है। वे हाई प्रोफाइल टारगेट हैं। इससे संदेश गया है कि अगर वे सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर कोई सुरक्षित नहीं है।’

विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटना से म्यांमार में ब्रिटेन के लिए कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। सैनिक शासकों ने बीते जुलाई में ब्रिटेन के कार्यवाहक राजदूत को देश से निकाल दिया था। हाल में म्यांमार सरकार ब्रिटिश कूटनीतिकों को वीजा देने में भी देर करती रही है। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, ये सारी कार्रवाइयां ब्रिटेन की तरफ से म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में की गई हैं।
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