फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र महासभा: स्नेहा दुबे की दुनिया को सलाह- सामूहिक प्रयासों से ही सतत विकास हासिल होगा

Wed, 13 Oct 2021 07:56 AM IST
संजीव कुमार झा एएनआई, संयुक्त राष्ट्र

सार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में सतत विकास के मुद्दे पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा कि हमारा मानना है कि हमारा मानव-केंद्रित दृष्टिकोण वैश्विक भलाई के लिए सर्वाधिक उपयोगी होगा। 
विज्ञापन
स्नेहा दुबे - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को एक बार फिर दोहराया कि सामूहिक प्रयासों से ही सतत विकास हासिल होगा और भारत इस दिशा में काम करना लगातार जारी रखेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा में सतत विकास के मुद्दे पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा कि हमारा मानना है कि हमारा मानव-केंद्रित दृष्टिकोण वैश्विक भलाई के लिए सर्वाधिक उपयोगी होगा। इसके अलावा वैश्विक जलवायु कार्रवाई के मुद्दे पर प्रथम सचिव ने कहा कि यह आवश्यक है कि बयानों के साथ ठोस कार्रवाई भी हो। जी20 में भारत अकेला देश है, जो पेरिस के लक्ष्यों को पूरा करने की ओर अग्रसर है।

विज्ञापन


कार्बन स्पेस खाली करने के लिए विकसित देशों को नेट-माइनस करना होगा: दुबे
स्नेहा दुबे ने 'वैश्विक नेट-जीरो' पर जोर देते हुए कहा कि यह लक्ष्य अलग-अलग जिम्मेदारी और समानता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। दुबे ने कहा कि विकासशील देशों के विकास के लिए विकसित देशों को नेट-माइनस करना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक कार्बन स्पेस को खाली करने के लिए विकसित देशों को नेट-माइनस करना ही होगा। 

जलवायु कार्रवाई के लिए जल्द से जल्द फंड जुटाने होंगे: स्नेहा दुबे
भारतीय राजनयिक ने कहा कि विकसित देशों द्वारा जलवायु कार्रवाई के लिए 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता हासिल करने के लिए अभी और ध्यान देने की जरूरत है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन जैसी हमारी पहल वैश्विक जलवायु साझेदारी में  बड़ा उदाहरण है। 
विज्ञापन


हमने पिछले दशक में वन क्षेत्रों में लक्ष्य हासिल किया: स्नेहा दुबे
प्रथम सचिव ने कहा कि भारत अब पिछले दशक में वन क्षेत्रों में लक्ष्य हासिल करने वाले शीर्ष 3 देशों में शामिल है। इसी अवधि में लगभग 30 लाख हेक्टेयर पौधे लगाए गए। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले पांच से सात वर्षों में भारत में शेरों, बाघों, तेंदुओं और गंगा नदी में डॉल्फिन की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं भूमि क्षरण के खतरे पर प्रकाश डालते हुए दुबे ने कहा किमरुस्थलीकरण का मुकाबला करने के लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों पर काम किया है। 

हम 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर खराब भूमि को उपजाऊ बनाएंगे: दुबे
उन्होंने कहा कि हम भूमि क्षरण तटस्थता की अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को प्राप्त करने के लिए ट्रैक पर हैं। हम 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें