"योगी" के नाम से मशहूर एक भारतीय मूल के जापानी व्यक्ति को राजधानी टोक्यो के इडोगावा वार्ड विधानसभा के लिए चुना गया है। 41 वर्षीय योगेंद्र पुराणिक जापान में चुनाव जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।
पुराणिक ने 21 अप्रैल को हुए चुनाव में कुल डाले गए 226,561 वैध मतपत्रों में से 6,477 वोट हासिल किए और पांचवे स्थान पर रहे।
वह शुरू में "जिसेदाई वो निनाऊ काई" (अगली पीढ़ी के लिए संगठन) और बाद में कॉन्सटीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीपी) में शामिल हो गए। उन्होंने सीडीपी की टिकट पर चुनाव लड़ा, जो अब तक की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है।
जापान कैसे पहुंचे पुराणिक
पुराणिक 1997 और 1999 में जापान सरकार की छात्रवृत्ति पर जापान पढ़ने गए थे। फिर 2001 में उन्होंने वहां नौकरी शुरू की। इसके बाद से वहीं रहने लगे। हालांकि उनकी दादी, बहन और भाई पुणे में ही रहते हैं। वहीं पुराणिक की मां उनके साथ जापान में रहती हैं और उनका बेटा अभी लंदन में पढ़ाई कर रहा है।
जापान की राजनीति में उतरे
आखिर जापान की राजनीति में आने का विचार कैसे आया। इस सवाल पर पुराणिक कहते हैं कि समाजसेवक के रूप में वे भारतीय और जापानी समाज में काफी सक्रिय रहे हैं। चीन और कोरिया में भी उनके दोस्त हैं। हालांकि उन्हें राजनीति में उतरने का विचार तीन साल पहले आया। उनका कहना है कि इडोगावा की सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही थी। इसीलिए उन्होंने इस साल चुनाव लड़ने के बारे में सोचा और जीत गए।
जापान और भारत की राजनीति में ये है फर्क
पुराणिक कहते हैं कि जापान में चुनाव बहुत शालीनता से और नियमों के मुताबिक होते हैं। वे कहते हैं कि जापान में उन्होंने एक-दूसरे को बुरा-भला या खराब शब्द कहने वाले भाषण नहीं सुने। कोई गलत काम होते भी नहीं देखे। वहां सभी राजनेता एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। वे कहते हैं कि जापान की राजनीति में धर्म बहुत अहम स्थान रखती है। कुछ धार्मिक संगठनों से जुड़े राजनीतिक दल काफी वोट हासिल करते हैं।
भारत और जापान में चुनाव प्रचार में क्या फर्क देखते हैं
भारत में लोकसभा चुनाव प्रचार में नेताओं एक दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी कर रहे हैं। योगेंद्र कहते हैं कि जापान में स्वच्छ राजनीति पर खासा जोर है। कोई उम्मीदवार किसी दूसरे नेता के बारे में बुरे शब्द नहीं कह सकता। प्रचार के दौरान अगर कोई उम्मीदवार कुछ गलत करे तो पुलिस और चुनाव अधिकारी सीधे फोन कर चेतावनी दे देते हैं। अगर किसी प्रत्याशी ने चेतावनी को तीन बार नजरअंदाज किया तो उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग सकती है।