यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने अगले वर्ष लांच होने वाले अपने एक्सोमार्स मिशन के लिए पैराशूट तैयार किए हैं। ये 21,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मंगल में प्रवेश करने वाले रोवर को धीमा करने के काम आएंगे। पैराशूट का ड्रॉप टेस्ट कामयाब रहा।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने अगले साल अपना मंगल मिशन एक्सोमार्स कामयाब बनाने के लिए सुपरसोनिक पैराशूट बनाए हैं। ये मंगल की सतह पर 21 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंचने वाले यान की गति को नियंत्रित कर उसे सुरक्षित उतारने में मददगार बनेंगे।
मंगल की सतह पर उतरने से पहले उसके वातावरण से सफलतापूर्वक गुजरने के बाद पैराशूट अंतरिक्ष यान की रफ्तार को धीमा करेगा। ईएसए ने दो पैराशूट का परीक्षण किया है। इसमें 15 मीटर चौड़े मुख्य पैराशूट ने सुपरसोनिक गति से त्रुटिरहित प्रदर्शन किया, वहीं 35 मीटर चौड़े दूसरे पैराशूट में मामूली क्षति पहुंची।
पैराशूट इस तरह करेंगे काम
पैराशूट 21,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से मंगल ग्रह की सतह की ओर पहुंचने वाले अंतरिक्ष यान को धीमा करेगा। 15 मीटर चौड़ा मुख्य पैराशूट तब खुलेगा जब यान सुपरसोनिक गति (ध्वनि की गति से तेज) पर होगा। दूसरे चरण का पैराशूट को सब सोनिक गति पर काम करेगा। पैराशूट के ड्रॉप टेस्ट 24 और 25 जून को स्वीडिश स्पेस कॉरपोरेशन एसरेंज में किए गए। एक्सोमार्स प्रोग्राम के टीम लीडर थियरी ब्लैंक्वार्ट ने कहा कि हमारे पास सुपरसोनिक पैराशूट डिजाइन है। यह मंगल पर उड़ान भर सकता है। अभी इसके दो और परीक्षण किए जाएंगे।
नासा ने फरवरी में पैराशूट से उतारा था अपना रोवर
बता दें, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का पर्सिवरेंस रोवर इसी साल 23 फरवरी को इतिहास रचते हुए मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था। इस रोवर को मंगल की सतह पर उतारने के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास पैराशूट का इस्तेमाल किया था। यह एक सुपरसोनिक पैराशूट था जिसने 12 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे रोवर को मंगल की सतह पर सुरक्षित उतारा था।