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कतर: देश ने लोकतंत्र की ओर बढ़ाए कदम, शूरा काउंसिल की सीटों पर हुए चुनाव

Sat, 02 Oct 2021 11:22 PM IST
सुभाष कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दोहा

सार

खाड़ी देशों में बहरीन ओमान और कुवैत के बाद कतर चौथा ऐसा देश है जहां इस तरह के चुनाव हो रहे हैं। बहरीन और ओमान में ऐसी ही सलाहकार परिषद है तो वहीं कुवैत में एक पूर्ण निर्वाचित संसद है। 
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कतर में शूरा काउंसिल की सीटों पर चुनाव आयोजित हुए। - फोटो : social media
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विस्तार
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कतर ने लोकतंत्र की तरफ अपना पहला कदम बढ़ा दिया है। खाड़ी देश कतर में आज पहली बार राष्ट्रीय चुनाव का आयोजन हुआ। देश के लोगों को पहली बार वोट डालने का मौका मिला है। यह मौका देश के पन्नों पर एक नया अध्याय बना है। इससे पहले तक देश में केवल म्यूनिसिपल(निगम) चुनाव होते थें।
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शूरा काउंसिल की 45 सीटों पर चुनाव 
कतर की सलाहकार परिषद शूरा काउंसिल की 45 सीटों के लिए चुनाव आयोजित किए गए, जिसमें से 30 सीटों के लिए आज मतदान का आयोजन हुआ। बाकी के 15 सदस्य कतर के शासक अमीर शेख़ तमीम बिन हम्माद अल-थानी द्वारा ही चुन जाएंगे। शूरा काउंसिल देश के सामान्य नीतियों और बजट को मंजूरी देने के विधायी अधिकार रखती है। सुरक्षा, आर्थिक और निवेश के मामलों के अधिकार देश के शासक के पास ही होते हैं। 

खाड़ी देशों में बहरीन ओमान और कुवैत के बाद कतर चौथा ऐसा देश है जहां इस तरह के चुनाव हो रहें हैं। बहरीन और ओमान में ऐसी ही सलाहकार परिषद है तो वहीं कुवैत में एक पूर्ण निर्वाचित संसद है। 
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26 महिला प्रत्याशी
मतदान केंद्रों पर आज बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखी गई। लोग काफी उत्साहित भी लग रहें थे। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही की 234 प्रत्याशियों में 26 प्रत्याशी महिलाएं थीं। यह संख्या बहुत छोटी ही सही लेकिन भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर जम कर प्रचार किया था। 

कतर में साल 2003 में इस चुनाव के लिए एक जनमत संग्रह हुआ था। देश में इसी साल जुलाई के महीने में मतदान के लिए कानून पास कराया गया।  इस कानून के अनुसार देश के 18 वर्ष से ऊपर के नागरिक मतदान में हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को यह साबित करना होगा की वो कतर के मूल नागरिक हैं और उनके पूर्वज कतर में पैदा हुए हों।
  
मतदान पर विवाद भी
चुनाव में लगाए के नियमों से कतर की अल-मुर्रा जनजाति में काफ़ी नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। एक नियम के अनुसार जो लोग 1971 से लगातार कतर में नहीं रह रहें हैं उन्हें भी वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया है। इस कारण देश की तीस लाख आबादी में से केवल दस लाख को ही मतदान का मौका मिल रहा है। इस नियम को लेकर अगस्त महीने में देश के भीतर प्रदर्शन भी हुए थें। अल-मुर्रा जनजाति और कतर के शाही परिवार के रिश्तें ज्यादा अच्छे नहीं बताए जाते। कतर और सऊदी के बीच चल रहे विवाद के दौर में भी इस जनजाति पर सऊदी समर्थक होने के आरोप लगें थे। 1996 में देश में हुई तख्तापलट की कोशिश में भी इसी जनजाति पर आरोप था। 

कतर है दुनिया का सबसे बड़ा गैस उत्पादक देश
कतर को दुनिया के सबसे बड़े गैस उत्पादक देश के तौर पर जाना जाता है। यहां की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे ज्यादा 59000 डॉलर है। 2022 के फुटबॉल विश्वकप का आयोजन भी यहीं होने वाला है। कतर को इस क्षेत्र में अमेरिका  का एक बड़ा सहयोगी बताया जाता है। अमेरिका और तालिबान के बीच समझौता करवाने में भी कतर ने अहम भूमिका निभाई थी। 
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