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स्वेज संकट के दौरान सहारा बने चीन के ‘इस्पाती ऊंट’, बेल्ट एंड रोड परियोजना का हैं हिस्सा

Tue, 30 Mar 2021 03:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग

सार

बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत बने ये रेल मार्ग काफी दूर तक रेगिस्तानी इलाके से गुजरता है। इसलिए इन ट्रेनों को स्टील कैमल यानी 'इस्पाती ऊंट' कहा जाता है...
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स्वेज नहर में फंसा जहाज - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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स्वेज नहर में एक विशाल जहाज के अटक जाने से उस क्षेत्र से होने वाला समुद्री परिवहन ठहर गया। इससे कई देशों में कई तरह की दिक्कते हुईं। अनुमान है कि कंपनियों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है। लेकिन इसी बीच चीन से यूरोप को होने वाली माल ढुलाई पर उतना फर्क नहीं पड़ा। इसकी वजह चीन के ‘इस्पाती ऊंट’ हैं। कई चीनी कंपनियां काफी हद तक यूरोप से आए ऑर्डर्स को समय पर पहुंचाने में कामयाब रहीं।

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चीन के कोरोना महामारी को जल्द संभाल लेने के बाद उसकी अर्थव्यवस्था में आई तेजी के कारण चीनी कंपनियों को बड़े पैमाने पर यूरोप और दूसरे देशों से ऑर्डर मिले हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक समानों से लेकर घरेलू उपयोग की चीजें तक की सप्लाई के ऑर्डर शामिल हैं। समुद्री परिवहन में लगने वाले ज्यादा समय और कंटेनरों की कमी के कारण चीन ने पहले से ही जमीनी मार्ग से रूस और मध्य एशिया तक सामान भेजने शुरू कर दिए थे। ये मार्ग उन दो हजार से ज्यादा मालगाड़ियों की है, जो चीन से यूरोप तक बिछाई गई रेल पटरियों पर दौड़ती हैं। 2020 में ऐसी रेल यात्राओं की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2016 से तुलना करें, तो 2020 की ये संख्या सात गुना ज्यादा थी।

ये रेल मार्ग काफी दूर तक रेगिस्तानी इलाके से गुजरता है। इसलिए इन ट्रेनों को स्टील कैमल यानी 'इस्पाती ऊंट' कहा जाता है। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में शंघाई स्थित व्यायाम उपकरण बनाने वाली एक कंपनी की एजेंट नीना फांग ने कहा कि उनकी कंपनी अकसर समुद्री मार्ग से निर्यात करती थीं। लेकिन 2020 के मध्य से समुद्री परिवहन की लागत में तेज इजाफा हुआ। साथ ही वहां परिवहन में दो गुना अधिक समय लगने लगा। तब इस कंपनी ने रेल मार्ग से निर्यात की शुरुआत की। अब ये कंपनी अपने निर्यात के लिए मुख्य रूप से रेल मार्ग पर निर्भर हो गई हैं। इस कंपनी के ज्यादातर ग्राहक फ्रांस और जर्मनी में हैं।
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चीन 2020 में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूरोपियन यूनियन का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बन गया। पिछले साल चीन से यूरोप को होने वाले निर्यात में छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वैसे अभी भी इस निर्यात का मुख्य मार्ग समद्र ही है। मसलन, शंघाई के पास स्थित यांगशान बंदरगाह से पिछली जनवरी में 20 फीट के 20 लाख कंटेनर यूरोप भेजे गए। जबकि जनवरी और फरवरी में रेल मार्ग से जाने वाले कंटेनरों की संख्या दो लाख नौ हजार ही थी। लेकिन जानकारों के मुताबिक गौर करने की बात यह है कि रेल मार्ग से होने वाला निर्यात लगातार बढ़ रहा है। पिछले हफ्ते स्वेज नहर में पैदा हुए संकट ने इस मार्ग की अहमियत पर अब नई रोशनी डाली है।

ये रेल मार्ग चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत बना है। विश्लेषकों के मुताबिक जब 2013 में ये परियोजना शुरू हुई, तब रेल मार्ग को लेकर काफी चर्चा हुई थी। इस मार्ग को तैयार करने के लिए चीन की केंद्रीय और राज्यों की सरकारों ने बड़ी मात्रा में सब्सिडी दी है। चीन के प्रांतों ने महामारी के दौरान इसमें अपना निवेश और बढ़ा दिया। चीन के निर्यातकों को इसकी कुशलता और अहमियत बताने के लिए उन्हें इस रेल मार्ग से यात्राओं पर ले जाया गया है। इससे अब छोटे कारोबारी भी अपने सामान मालगाड़ियों से भेजने लगे हैं। इससे रेल मार्ग लगातार अधिक उपयोगी होता गया है।

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