कारगिल की लड़ाई पूरी तरह से तत्कालीन पाकिस्तानी आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ के दिमाग की उपज थी। उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल तक को अंधेरे में रखा। यहां तक कि पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना को भी बहुत सीमित जानकारी दी गई। जब तक पाकिस्तानी सेना ने जेहादी बनकर एलओसी पार नहीं कर ली, तब तक मुशर्रफ ने सीक्रेट और धोखे से भरे कारगिल ऑपरेशन की जानकारी किसी को नहीं दी। कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तानी सेना के पहुंचने के बाद मुशर्रफ ने जहां इसकी जानकारी देना अत्यंत जरूरी समझा, केवल तभी बेहद संक्षिप्त रूप में उसे साझा किया गया। भारतीय सेना को धोखा देने के लिए मुशर्रफ ने रेडियो पर जेहादियों की दो भाषाओं में झूठे संदेश जारी कराए गए।
बता दें कि कारगिल की लड़ाई खत्म होने के कई साल बाद नवाज शरीफ ने सार्वजनिक तौर पर यह बात कही थी कि परवेज मुशर्रफ को सेना सौंपना उनकी सबसे बड़ी गलती थी। मुशर्रफ के दुस्साहस को रोकने वाला कोई नहीं था। हैरानी की बात तो यह रही कि पाकिस्तानी सरकार को मुशर्रफ के कारगिल ऑपरेशन की भनक तक नहीं लग सकी। पाकिस्तानी नौसेना और एयरफोर्स को भी मुशर्रफ ने अंधेरे में रखा। कारगिल लड़ाईl के दौरान भारतीय सेना के प्रमुख रहे वेद प्रकाश मलिक ने अपनी किताब 'फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी' के चेप्टर 'दा डार्क विन्टर' में लिखा है, पाकिस्तानी फौज के जनरल परवेज मुशर्रफ के धोखे को समझने वाला कोई नहीं था। रिसर्च एंड एनॉलिसिस विंग (रॉ) ने लड़ाई से पहले और लड़ाई के दौरान जो फोन कॉल इंटरसेप्ट की, उसमें इस तरह के कई खुलासे हुए थे। परवेज मुशर्रफ और उनके विश्वासपात्र ले.जनरल मोहम्मद अजीज खान के बीच हुई बातचीत को रॉ ने इंटरसेप्ट किया था। इसमें पता चला कि मुशर्रफ ने कारगिल में अपने धोखे का जो जाल फैलाया था, उसकी जानकारी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके वरिष्ठ मंत्रियों को नहीं दी गई। पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना के कमांडरों को केवल यह बताया गया कि जेहादी घुसपैठ कर रहे हैं। जेहादियों के रूप में पाकिस्तानी सेना एलओसी के पार चली गई है, इस बात की जानकारी भी ठीक से नहीं दी गई।
भारतीय सेना को धोखा देने के लिए मुशर्रफ की चाल
पाकिस्तानी सेना, जेहादियों के वेश में एलओसी पार कर चुकी थी। भारतीय खुफ़िया एजेंसियों को गच्चा देने के लिए मुशर्रफ ने कारगिल इलाके में एलओसी पर झूठे रेडियो संदेश जारी करा दिए। ये संदेश 'बाल्टी और पश्तो' भाषा में थे।एलओसी पर पाकिस्तान की ओर जेहादी समूह इन्हीं भाषाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। रेडियो पर जारी संदेशों में ऐसे हालात बनाए जा रहे थे कि जिससे भारतीय एजेंसियों को लगे कि कारगिल क्षेत्र में जेहादी ही सक्रिय हैं। वे बड़ी घुसपैठ करने की फ़िराक़ में हैं। रेडियो संदेशों में यह भी कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी सेना जेहादियों का साथ नहीं दे रही है। ये सब भारतीय सेना को यह विश्वास दिलाने की चाल थी कि एलओसी पर जो कुछ चल रहा है, उसमें पाकिस्तानी सेना शामिल नहीं है। परवेज मुशर्रफ ने इस बाबत पाकिस्तान की सरकार और सेना के अधिकारिक प्रवक्ता को भी कुछ नहीं बताया। उन्हें भी जेहादियों की घुसपैठ जैसा कुछ बताकर चुप करा दिया गया।
पाकिस्तानी सेना ने सर्दी के मौसम में ही हथियार पहुंचाना शुरू किया
परवेज मुशर्रफ ने कारगिल के धोखे की रुपरेखा कई माह पहले ही तैयार कर ली थी। जनवरी 1999 में पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में हथियार और गोला-बारुद पहुंचाना शुरु कर दिया। सर्दी का मौसम इसलिए चुना गया था क्योंकि उस दौरान कारगिल में सैन्य दस्ते व स्थानीय नागरिकों की आवाजाही कम से कम रहती है। चारों तरफ बर्फ़ होती है। अप्रैल 1999 तक पाकिस्तानी सेना के छोटे छोटे दस्ते कारगिल में पहुंच चुके थे। एक दूसरी इंटेलीजेंस रिपोर्ट में पता चला कि पाकिस्तानी आर्मी ने उत्तरी क्षेत्र में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। पाकिस्तानी सेना ने दर्जनों रेडियो स्टेशन स्थापित कर उनके द्वारा फर्जी संदेश जारी कराए गए।