कोरोना वायरस ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को घुटनों के बल ला दिया है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका पर तो यह कहर बनकर गिरा है, जहां इस महामारी से अमेरिका में अब तक 16,739 लोगों की मौत हो चुकी है। यही नहीं, कोरोना वायरस के चलते यहां की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान हुआ है। यही कारण है कि अमेरिका में महज तीन हफ्तों में 1.68 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई है।
कोरोना वायरस से हुए नुकसान और डर का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि, दुनिया भर के धार्मिक नेताओं ने लोगों से गुड फ्राइडे और ईस्टर अपने-अपने घरों में ही मनाने की अपील की है।
न्यूयॉर्क में लगातार तीसरे दिन भी मरने वालों की संख्या 800 के करीब रही। अकेले न्यूयॉर्क में अब तक 7,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जो अमेरिका में हुई 16,000 से ज्यादा मौतों की करीब आधी संख्या है।
न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रीयू कुओमो ने कहा कि यह हैरान करने वाला और दुखद है। मेरे पास इसके लिए शब्द नहीं हैं।
हालांकि, इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है, क्योंकि अस्पताल में भर्ती किये जा रहे, आईसीयू में रखे जा रहे और वेंटीलेटर पर रखे जा रहे संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में कमी आई है।
वहीं, ब्रिटेन का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बुरे दौर का सामना कर रहा है। हालांकि, इस बीच राहत की खबर यह है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन आईसीयू से बाहर आ गए हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद उन्हें इलाज के लिए लंदन के एक अस्पताल में रखा गया था।
इस दौरान कई देशों की सरकारों की तरफ से साफ चेतावनी दी गई है कि लोग सामाजिक मेल जोल से दूर रहें। पूरे यूरोप में ईस्टर का अवसर यात्रा के लिये सबसे व्यस्त समय होता है। हालांकि, कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने सड़कों पर अवरोधक लगाए हैं, जिससे लोगों को आपस में मिलने जुलने से रोका जा सके।
दरसअल, ब्रिटेन और न्यूयार्क में मरने वाले लोगों की बढ़ती संख्या, जापान में संक्रमण के नये मामले और भारत के कई शहरों में तेजी से संक्रमण बढ़ने से यह साफ हो गया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म होने से दूर है।