वर्ष 2015 में प्रस्तुत पेरिस समझौते ने अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य (जीजीए) की अवधारणा पेश की। यह वैश्विक न्यूनीकरण लक्ष्य के समानांतर है। इसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) काल के स्तर के मुकाबले 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के खत्म होने से दो दिन पूर्व रविवार को एक मसौदा दस्तावेज जारी किया गया है। इसमें देशों का जलवायु परिवर्तन से निपटने के अनुकूल प्रयासों व सामूहिक प्रगति पर नजर रखने के लिए मार्गदर्शन किया गया है। दस्तावेज में यह स्वीकार किया गया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में फंड की कमी बड़ी बाधा है।
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वर्ष 2015 में प्रस्तुत पेरिस समझौते ने अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य (जीजीए) की अवधारणा पेश की। यह वैश्विक न्यूनीकरण लक्ष्य के समानांतर है। इसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) काल के स्तर के मुकाबले 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है। अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य संबंधी ग्लासगो-शर्म अल-शेख कार्य योजना मिस्र में कॉप-26 के दौरान लाई गई थी। इसके तहत कार्यशालाएं व वार्ताएं शुरू की गईं, ताकि कॉप-28 में जीजीए के लिए कार्य योजना लाई जा सके।
पिछले महीने जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार गरीब व विकासशील देशों को जलवायु अनूकूलन के लिए हर साल 215-387 अरब डॉलर की जरूरत है, जबकि केवल 21 अरब डॉलर मिल रहे हैं। उधर, कॉप-28 के अध्यक्ष सुल्तान अल-जबर ने रविवार को वार्ताकार अच्छी प्रगति कर रहे हैं, लेकिन इसमें पर्याप्त तेजी नहीं है।