पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लॉन्च करने के साथ ही अपनी अगली राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर से पर्दा हटा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप ने 2014 के बाद लोकप्रियता और राजनीति में अपनी ताकत सोशल मीडिया का खास इस्तेमाल करते हुए ही बनाई थी। इस साल छह जनवरी को कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उन्हें प्रतिबंधित कर दिया था। अब ट्रंप ने उसका जवाब अपना सोशल मीडिया मंच बना कर दिया है।
ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म का नाम ‘सोशल ट्रूथ’ (सामाजिक सच) रखा है। इसके लिए वे पैसा शेयर मार्केट से जुटाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसके पहले जब ट्रंप ने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने की बात की थी, तब उसे मजाक समझा गया था। लेकिन अब इसे उन्होंने हकीकत बना दिया है। अपनी इस कंपनी के चेयरमैन वे खुद होंगे। जबकि जाने-माने टीवी प्रोड्यूशर स्कॉट सेंट जॉन को इसका सीईओ बनाया गया है।
कंपनी का नाम ट्रंप मीडिया ग्रुप रखा गया है। इसकी वेबसाइट बन कर तैयार हो गई है। सोशल ट्रूथ का प्री-ऑर्डर विकल्प एपल के एप स्टोर पर आ चुका है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह देखने में काफी कुछ ट्विटर से मेल खाता है। कंपनी के बयान में कहा गया है कि इसकी औपचारिक शुरुआत वह 2022 के आरंभ में करेगी।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के प्रवक्ता ने बयान में दी गई जानकारियों के अलावा और कुछ कहने से इनकार किया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्रंप की नई मीडिया कंपनी के बारे में साफ जानकारी नहीं दी गई है। इसके आधार पर कई विश्लेषकों ने शक जताया है कि यह एक शेल (फर्जी) कंपनी के तौर पर अभी बनाई गई है। इसके बावजूद ट्रंप की इस पहल को गंभीरता से लिया जा रहा है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप कई महीनों से अपना सोशल मीडिया नेटवर्क लाने की बात कह रहे थे। बीते जुलाई में उनके निकट सलाहकार जेसॉन मिलर ने गेटर (Gettr) नाम से अपना नया सोशल मीडिया एप लॉन्च किया था। लेकिन उसमें ट्रंप की भागीदारी नहीं थी। अब मिलर ने एक बयान में ट्रंप को बधाई देते हुए कहा है- ‘इसके बाद अब फेसबुक और ट्विटर को अपने बाजार का और अधिक हिस्सा खोना पड़ेगा।’