इस्राइल के ईरान पर हमले (फाइल फोटो)
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जी-7 देशों - कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका - ने एक बयान जारी कर पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है और जोर देकर कहा है कि बढ़ते संघर्ष का कूटनीतिक समाधान 'अभी भी संभव है।'
इटली से जारी एक बयान में कहा गया है कि जी-7 ने दोहराया है कि क्षेत्रीय स्तर पर संघर्ष किसी के हित में नहीं है और इसका कूटनीतिक समाधान अभी भी संभव है। इटली अभी जी-7 का अध्यक्ष है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, इटली एक कूटनीतिक समाधान के लिए प्रयास करता रहेगा। मैंने नेताओं के स्तर की बैठक बुलाई है, ताकि हम पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा कर सकें। इस बैठक का मकसद संकट के समाधान के लिए एक सुसंगत प्रक्रिया को विकसित करना है, जिसमें सभी जी-7 सदस्य देशों की भागीदारी होगी।
व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने आज जी7 नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने इस्राइल पर मिसाइल हमले के बाद ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का आह्वान किया। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "बाइडन और जी7 ने इजरायल के खिलाफ ईरान के हमले की स्पष्ट शब्दों में निंदा की। राष्ट्रपति बाइडन ने इस्राइल और उसके लोगों के प्रति अमेरिका की पूर्ण एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया, और इस्राइल की सुरक्षा के लिए अमेरिका की दृढ़ प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।"
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इस्राइल की जवाबी हमले की कार्रवाई का समर्थन नहीं करते हैं। जब बाइडन से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह ऐसी संभावना का समर्थन करते हैं, तो उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया। बाइडन ने कहा कि इस्राइल को कल के ईरानी मिसाइल हमले का जवाब देने का अधिकार है। लेकिन उसे ऐसा समान रूप से करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका इस हमले के कारण ईरान पर नए प्रतिबंध लगाएगा।
इससे पहले, मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा था कि ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे और अमेरिका यह सुनिश्चित करने के लिए इस्राइल के साथ मिलकर काम करेगा। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा था।