अफ्रीकी देश नाईजीरिया में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है कि पैक्सफुल नाम की कंपनी के सीईओ रे यूसुफ ने कहा है कि पश्चिमी देशों के बाशिंदों के लिए उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। पैक्सफुल क्रिप्टो विनिमय की सेवा देने वाली कंपनी है। ये कंपनी यूजर्स को एक दूसरे सीधे क्रिप्टो कारोबार करने की सुविधा देती है। क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के इच्छुक ग्राहक इस प्लेटफॉर्म पर अर्जी देते हैँ। जब तक वे भुगतान नहीं कर देते, ये कंपनी उनके क्रिप्टो सिक्के को अपने खाते में रखती हैं। इस कंपनी के मुताबिक उससे 15 लाख ग्राहक जुड़े हुए हैं। उनमें एक तिहाई अफ्रीका में हैँ। नाईजीरिया उनका सबसे बड़ा बाजार है। बीते जून में पूरा हुए साल में उसके ग्राहकों की संख्या में 83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
जानकारों का कहना है कि विभिन्न देशों की वित्तीय सेवाओं की अकुशलता ने लोगों को क्रिप्टोकरेंसी की तरफ धकेला है। रे यूसुफ ने कहा- ‘अगर आप किसी अफ्रीकी देश से पड़ोसी देश में पैसा भेजना चाहें, तो एक दुःस्वप्न से गुजरना पड़ता है। अफ्रीका से बाहर कहीं पैसा भेजना तो लगभग असंभव ही साबित होता है।’ विश्व बैंक के मुताबिक 2020 की पहली तिमाही में सब-सहारा अफ्रीका से किसी अन्य देश में 200 डॉलर भेजने पर औसतन उस रकम का नौ फीसदी ट्रांजेक्शन शुल्क के रूप में चला गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस सूरत में इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि उस इलाके के लोग क्रिप्टोकरेंसी की तरफ झुक रहे हैं।
पॉल डोमयेन का कहना है कि एल सल्वाडोर में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने का प्रयोग सफल होगा या नहीं, यह मालूम नहीं है। लेकिन इस देश के फैसले से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर पूरा खेल अब बदल गया है। उसके अनुभव से यह पता चलेगा कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किस ढंग से होगा।