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एल सल्वाडोर की राह पर क्यूबा: इस देश ने आखिर क्यों किया क्रिप्टोकरेंसी अपनाने का फैसला?

Sat, 28 Aug 2021 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना

सार

क्यूबा के सरकारी गजट के मुताबिक क्यूबा सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने संबंधी प्रस्ताव को पारित कर दिया है। इसमें कहा गया है कि क्यूबा का सेंट्रल बैंक अब क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को ‘सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य’ की पूर्ति के लिए अधिकृत कर सकता है...
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बिटक्वाइन - फोटो : pixabay
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विस्तार
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एल सल्वाडोर के बाद क्यूबा ऐसा दूसरा देश बना है, जिसने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने का फैसला किया है। एल सल्वाडोर में दक्षिणपंथी सरकार है। लेकिन क्यूबा की वामपंथी सरकार ने ये फैसला क्यों किया, इस बारे में अब कयास लगाए जा रहे हैं। आम राय यही बनी है कि क्यूबा ने ये फैसला अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को कम करने के मकसद से लिया है।

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क्यूबा के सरकारी गजट के मुताबिक क्यूबा सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने संबंधी प्रस्ताव को पारित कर दिया है। इसमें कहा गया है कि क्यूबा का सेंट्रल बैंक अब क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को ‘सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य’ की पूर्ति के लिए अधिकृत कर सकता है। इसके लिए सेंट्रल बैंक जल्द ही नियमों का एलान करेगा। उसमें क्यूबा में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल संबंधी कायदे तय किए जाएंगे। साथ ही क्रिप्टो से संबंधित सेवा देने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने और उन पर नियंत्रण रखने की प्रक्रिया भी तय की जाएगी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हाल के महीनों में क्यूबा-वासियों के बीच क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। क्यूबा पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यहां के लोगों के लिए डॉलर का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। हाल में जो बाइडन प्रशासन ने प्रतिबंधों को और सख्त करने की घोषणा की थी। प्रतिबंधों के कारण क्यूबा के लोग वीजा या मास्टर कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर सकते। पिछले साल नवंबर में वेस्टर्न यूनियन ने क्यूबा में डॉलर भेजना रोक दिया था। वेस्टर्न यूनियन दुनिया की सबसे बड़ी मनी ट्रांसफर सेवा है। उसके फैसले से विदेशों में काम करने वाले क्यूबा के लोगों के लिए अपनी कमाई को वापस देश भेजना बेहद कठिन हो गया।

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इस साल जून में एल सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना था, जिसने क्रिप्टोकरेंसी को सरकारी मान्यता दी थी। तब देश की संसद ने एक कानून पारित कर बिटकॉइन को देश का लीगल टेंडर (कानूनी मुद्रा) बना दिया था। एल सल्वाडोर में ये फैसला राष्ट्रपति नायिब बुकेले की पहल पर हुआ था। बुकेले ने बीते गुरुवार को एलान किया कि बिटकॉइन को लीगल टेंडर मानने का फैसला अगले सात सितंबर से लागू हो जाएगा। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि बिटकॉइन का इस्तेमाल लोगों की इच्छा पर होगा। यानी पुरानी मुद्रा भी प्रचलन में बनी रहेगी।

बुकेले ने कहा- ‘बिटकॉइन का इस्तेमाल वैकल्पिक होगा। कोई अगर नहीं चाहता है तो उसे भुगतान बिटकॉइन में नहीं किया जाएगा। वह भुगतान के लिए डॉलर का चयन करने में सक्षम बना रहेगा।’ एल सल्वाडोर में 2001 में अमेरिकी डॉलर को आधिकारिक मुद्रा बना दिया गया था। तब से तनख्वाह, पेंशन आदि का भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता रहा है। अभी ये सिलसिला चलता रहेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक एल सल्वाडोर ने बिटकॉइन अपनाने का फैसला डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए किया। एल सल्वाडोर की अर्थव्यवस्था विदेशों में रहने वाले वहां के लोगों की कमाई पर काफी निर्भर रही है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में विदेश में नौकरी करने वाले देश के लोगों ने छह अरब डॉलर एल सल्वाडोर भेजे थे। यह वहां की अर्थव्यवस्था का 20 फीसदी हिस्सा था। अब ऐसे लोगों को अपनी कमाई भेजने में काफी आसानी हो जाएगी।

जानकारों के मुताबिक क्यूबा के क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने के पीछे भी मुख्य मकसद विदेशों में नौकरी करने वाले क्यूबा के लोगों की कमाई को देश लाना आसान बनाना है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण खासकर अमेरिका में रहने वाले क्यूबाई अपने परिवारों को अपनी कमाई नहीं भेज पा रहे हैं। एल सल्वाडोर ने देश में 1,500 क्रिप्टोकरेंसी के एटीएम लगाने का फैसला किया है। इस पर दस लाख डॉलर खर्च आएगा। इन एटीएम का इस्तेमाल बिटकॉइन खरीदने और बेचने के लिए किया जाएगा। क्यूबा भी शायद इसी म़ॉडल को अपनाएगा।
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