इस साल जून में एल सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना था, जिसने क्रिप्टोकरेंसी को सरकारी मान्यता दी थी। तब देश की संसद ने एक कानून पारित कर बिटकॉइन को देश का लीगल टेंडर (कानूनी मुद्रा) बना दिया था। एल सल्वाडोर में ये फैसला राष्ट्रपति नायिब बुकेले की पहल पर हुआ था। बुकेले ने बीते गुरुवार को एलान किया कि बिटकॉइन को लीगल टेंडर मानने का फैसला अगले सात सितंबर से लागू हो जाएगा। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि बिटकॉइन का इस्तेमाल लोगों की इच्छा पर होगा। यानी पुरानी मुद्रा भी प्रचलन में बनी रहेगी।
बुकेले ने कहा- ‘बिटकॉइन का इस्तेमाल वैकल्पिक होगा। कोई अगर नहीं चाहता है तो उसे भुगतान बिटकॉइन में नहीं किया जाएगा। वह भुगतान के लिए डॉलर का चयन करने में सक्षम बना रहेगा।’ एल सल्वाडोर में 2001 में अमेरिकी डॉलर को आधिकारिक मुद्रा बना दिया गया था। तब से तनख्वाह, पेंशन आदि का भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता रहा है। अभी ये सिलसिला चलता रहेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक एल सल्वाडोर ने बिटकॉइन अपनाने का फैसला डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए किया। एल सल्वाडोर की अर्थव्यवस्था विदेशों में रहने वाले वहां के लोगों की कमाई पर काफी निर्भर रही है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में विदेश में नौकरी करने वाले देश के लोगों ने छह अरब डॉलर एल सल्वाडोर भेजे थे। यह वहां की अर्थव्यवस्था का 20 फीसदी हिस्सा था। अब ऐसे लोगों को अपनी कमाई भेजने में काफी आसानी हो जाएगी।
जानकारों के मुताबिक क्यूबा के क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने के पीछे भी मुख्य मकसद विदेशों में नौकरी करने वाले क्यूबा के लोगों की कमाई को देश लाना आसान बनाना है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण खासकर अमेरिका में रहने वाले क्यूबाई अपने परिवारों को अपनी कमाई नहीं भेज पा रहे हैं। एल सल्वाडोर ने देश में 1,500 क्रिप्टोकरेंसी के एटीएम लगाने का फैसला किया है। इस पर दस लाख डॉलर खर्च आएगा। इन एटीएम का इस्तेमाल बिटकॉइन खरीदने और बेचने के लिए किया जाएगा। क्यूबा भी शायद इसी म़ॉडल को अपनाएगा।