वैश्विक महामारी कोरोना वायरस और इससे बचने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्था को गर्त में पहुंचा दिया है। इसके चलते बेरोजगारी की समस्या और अधिक बढ़ गई है। एक आंकड़े के अनुसार ब्रिटेन में लॉकडाउन के कारण करीब 20 लाख लोग बेरोजगार हो गए। वहीं, हर चार में से एक कंपनी इस साल अप्रैल के अंत तक अपने स्टाफ में कटौती करने जा रही है। जिसके चलते करीब 26 लाख और लोग बेरोजगार होने की कगार पर आ गए हैं।
रिजॉल्यूशन फाउंडेशन के अनुसार लॉकडाउन के दौरान नौकरी खोकर दोबारा काम न पाने वालों की संख्या 19 लाख है। जबकि सरकार के अनुसार यह केवल 12 लाख है। फाउंडेशन के अनुसार, इनमें से हर पांच में एक व्यक्ति को डर है कि उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी और 30 अप्रैल को फर्लो (कुछ समय की छुट्टी) योजना बंद होने के बाद उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी। कुछ व्यापारिक घरानों ने कहा कि अगर योजना आगे नहीं बढ़ती है तो उन्हें स्टाफ को निकालना होगा।
फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार अगले तीन महीने में करीब 26 लाख लोगों की नौकरी जा सकती है। यह देश के कुल कर्मचारियों का आठ फीसदी है। ब्रिटिश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के सर्वे में सामने आया है कि अगर सरकारी सहायता का कार्यक्रम बंद होता है तो देश के व्यापारों का एक बड़ा हिस्से ने स्टाफ कम करने पर सहमति जताई है। उधर, प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को उम्मीद है कि तेज टीकाकरण कार्यक्रम से दुकानों, रेस्त्रां और बार आदि को गर्मी तक खोला जा सकता है।