क्वारंटीन में रह रहे लोग
भूटान में सख्त क्वारंटीन पॉलिसी बनाई गई है। वायरस से संक्रमित सभी लोगों की निगरानी की जा रही है ताकि वह किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के संपर्क में ना आएं। इस महामारी से बचने के लिए भूटान ने खुद को पहले ही तैयार कर लिया। और बीते दिनों 31 मार्च से 21 दिन के लिए क्वारंटीन बढ़ाने का फैसला किया। देश में दो तरह के क्वारंटीन सेंटर हैं एक तो घर में दूसरा सरकारी। क्वारंटीन भी लॉकडाउन का ही एक रूप है। इसमें घर से बाहर निकलने के अलावा और कोई पाबंदी नहीं है। भूटान के प्रधानमंत्री की ओर से ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई कि वह क्वारंटीन की समय सीमा बढ़ा रहे हैं। यह ऐहतियातन उठाया गया कदम है ताकि भूटान इस महामारी के संपर्क से अपने लोगों को बचा सके।
पर्यटकों पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी
भूटान में कोरोना वायरस का पहला केस 6 मार्च को मिला था जिसके बाद से ही भूटान सरकार ने सभी पर्यटकों के लिए तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी थी। बेशक पर्यटन भूटान सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा स्रोत है लेकिन भूटान का शासन चलाने वाले बाहर की दुनिया से कम से कम संबंध रखना चाहते हैं ताकि इस वक्त उनका देश सुरक्षित रहे। यहां सरकार पहले से भी पर्यटकों की संख्या को सीमित रखती है। यहां की सरकार ने पहले संक्रमित मरीज मिलने के बाद ही तुरंत सभी समारोहों पर पाबंदी लगा दी। भारत में ये बहुत बाद में किया गया।
सीमा बंद
भूटान में रोजाना कोलकाता से फ्लाइट के जरिए करीबन डेढ़ सौ लोग पहुंचते हैं और दार्जिलिंग से सड़क मार्ग से लगभग साढ़े तीन सौ लोग यहां आते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार ने पहले ही अपनी सीमाएं बंद कर दीं। केवल खाने-पीने की चीजों को ही देश की सीमा में आने की अनुमति थी।
पर्यावरण को प्राथमिकता
कोरोना वायरस पर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रमुख, इंगर एंडरसन ने बीते दिनों कहा था प्रकृति से छेड़छाड़ की वजह से ही मानव जाति हमेशा इस तरह की बीमारियों का शिकार बनती है। लोगों का यह सोचना गलत है कि स्वास्थ्य का पर्यावरण नीति से कुछ लेना देना नहीं है जबकि हमारा स्वास्थ्य पूरी तरह से जलवायु, प्रकृति और अन्य जीवों पर निर्भर करता है। भूटान में पेड़ लगाना लोकप्रिय है। इसके अलावा यहां प्लास्टिक की थैलियां साल 1999 से प्रतिबंधित हैं और तंबाकू पूरी तरह से गैरकानूनी है। यहां के कानून के मुताबिक देश के 60% भाग में जंगल होने ही चाहिए।
साफ-सफाई के प्रति जागरुकता
भारत में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी को आया था। सिर्फ दो महीनों में यह 1600 पार चला गया है। 14 मार्च के बाद केसों में अचानक तेजी आई है। जिसे देखते हुए सरकार ने देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया है।