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भूटान में कोरोना वायरस के मामले कम क्यों, सरकार ने उठाए कौन से जरूरी कदम?

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भूटान - फोटो : ट्विटर
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देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मंगलवार को कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़कर 1,637 हो गई है जबकि देशभर में इस वायरस से मरने वालों की संख्या 38 पहुंच गई है। वहीं भारत से सटे हुए और हिमालय की गोद में बसे पर्वतीय देश भूटान में ये महामारी अपना तांडव दिखाने में नाकामयाब साबित हो रही है। ऐसा कैसे संभव है कि भारत से सटे होने के बावजूद भूटान में कोरोना का संक्रमण न के बराबर है। आइए बताते हैं सरकार ने इसके पीछे किस तरह की रणनीति अपनाई है।

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भूटान दक्षिण एशिया का बड़ा टूरिस्ट प्लेस है, ऐसे में यहां बड़ी संख्या में विदेशी लोग आते रहते हैं लेकिन बावजूद इसके यहां स्थिति नियंत्रण में है। भूटान सरकार की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक देश में अब तक चार लोगों को ही कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। और इस खतरनाक महामारी से अभी तक किसी की भी जान नहीं गई है। फ्लू की जांच करने के लिए देश में 46 क्लीनिक मौजूद हैं। अब तक 28480 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

भूटान - फोटो : Reuters

क्वारंटीन में रह रहे लोग

भूटान में सख्त क्वारंटीन पॉलिसी बनाई गई है। वायरस से संक्रमित सभी लोगों की निगरानी की जा रही है ताकि वह किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के संपर्क में ना आएं। इस महामारी से बचने के लिए भूटान ने खुद को पहले ही तैयार कर लिया। और बीते दिनों 31 मार्च से 21 दिन के लिए क्वारंटीन बढ़ाने का फैसला किया। देश में दो तरह के क्वारंटीन सेंटर हैं एक तो घर में दूसरा सरकारी। क्वारंटीन भी लॉकडाउन का ही एक रूप है। इसमें घर से बाहर निकलने के अलावा और कोई पाबंदी नहीं है। भूटान के प्रधानमंत्री की ओर से ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई कि वह क्वारंटीन की समय सीमा बढ़ा रहे हैं। यह ऐहतियातन उठाया गया कदम है ताकि भूटान इस महामारी के संपर्क से अपने लोगों को बचा सके।

पर्यटकों पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी

भूटान में कोरोना वायरस का पहला केस 6 मार्च को मिला था जिसके बाद से ही भूटान सरकार ने सभी पर्यटकों के लिए तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी थी। बेशक पर्यटन भूटान सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा स्रोत है लेकिन भूटान का शासन चलाने वाले बाहर की दुनिया से कम से कम संबंध रखना चाहते हैं ताकि इस वक्त उनका देश सुरक्षित रहे। यहां सरकार पहले से भी पर्यटकों की संख्या को सीमित रखती है। यहां की सरकार ने पहले संक्रमित मरीज मिलने के बाद ही तुरंत सभी समारोहों पर पाबंदी लगा दी। भारत में ये बहुत बाद में किया गया।

भूटान - फोटो : Pixabay

सीमा बंद

भूटान में रोजाना कोलकाता से फ्लाइट के जरिए करीबन डेढ़ सौ लोग पहुंचते हैं और दार्जिलिंग से सड़क मार्ग से लगभग साढ़े तीन सौ लोग यहां आते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार ने पहले ही अपनी सीमाएं बंद कर दीं। केवल खाने-पीने की चीजों को ही देश की सीमा में आने की अनुमति थी।


पर्यावरण को प्राथमिकता

कोरोना वायरस पर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रमुख, इंगर एंडरसन ने बीते दिनों कहा था प्रकृति से छेड़छाड़ की वजह से ही मानव जाति हमेशा इस तरह की बीमारियों का शिकार बनती है। लोगों का यह सोचना गलत है कि स्वास्थ्य का पर्यावरण नीति से कुछ लेना देना नहीं है जबकि हमारा स्वास्थ्य पूरी तरह से जलवायु, प्रकृति और अन्य जीवों पर निर्भर करता है। भूटान में पेड़ लगाना लोकप्रिय है। इसके अलावा यहां प्लास्टिक की थैलियां साल 1999 से प्रतिबंधित हैं और तंबाकू पूरी तरह से गैरकानूनी है। यहां के कानून के मुताबिक देश के 60% भाग में जंगल होने ही चाहिए।

साफ-सफाई के प्रति जागरुकता

भूटान के नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक अपने जन्मदिन पर देशवासियों से आसपास साफ-सफाई रखने की अपील करते हैं। इस छोटे से देश के राजा की अपील पर वहां के लोग अमल भी करते हैं। ऐसे में यहां लोगों में साफ-सफाई को लेकर काफी जागरुकता है।

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भारत में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी को आया था। सिर्फ दो महीनों में यह 1600 पार चला गया है। 14 मार्च के बाद केसों में अचानक तेजी आई है। जिसे देखते हुए सरकार ने देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया है।
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