फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

चीन: कोरोना मरीजों को बचाने में जुटे वुहान के 63 फीसदी डॉक्टर-नर्सों के दिमाग पर हुआ बुरा असर

अमर उजाला रिसर्च टीम, वुहान। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 05 Apr 2020 06:35 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना वायरस - फोटो : PTI

कोरोना की वजह से वेंटिलेटरों पर सैकड़ों की संख्या में दम तोड़ते मरीजों को लगातार देखते रहे चीन के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के दिल व दिमाग पर गहरा असर हुआ है। करीब 63 फीसदी ने स्वीकार किया है कि लगातार आघात पहुंचाने वाले दृश्यों ने उनके दिमाग को बीमार किया है।

इनमें से 17.5 फीसदी मनोचिकित्सकों से थेरैपी करवा रहे हैं। बाकी दूसरे तरीकों से सामान्य होने का प्रयास कर रहे। दिल को झकझोर देने वाली यह जानकारी करीब एक हजार डॉक्टर व नर्सों पर चीन और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययन में सामने आए हैं।



चीन का वुहान शहर जनवरी-फरवरी में कोरोनावायरस संक्रमण का केंद्र बना रहा था। इसके इलाज में जुटे हजारों डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ ने भी ऐसे विकट भावनात्मक हालात झेले। प्रमुख संस्थानों ने इसके असर को समझने के लिए वुहान के 994 चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के बीच अध्ययन करवाया तो यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

इन भावनात्मक आवेगों को झेला

  • इन लोगों ने महामारी की शुुरुआत में डर और बेचैनी महसूस की। बाद में उनमें अवसाद और पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस के लक्षण सामने आए।
  • संक्रमण के जोखिमपूर्ण वातावरण में और संक्रमित लोगों के लिए काम करना इसकी प्रमुख वजह बनी।
  • पूर्व में हुए इस प्रकार के अध्ययनों के अनुसार डॉक्टरों के दिमाग पर यह असर जीवन भर बना रहता है।
विज्ञापन

कोरोना वायरस - फोटो : PTI
कोरोना की वजह से वेंटिलेटरों पर सैकड़ों की संख्या में दम तोड़ते मरीजों को लगातार देखते रहे चीन के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के दिल व दिमाग पर गहरा असर हुआ है। करीब 63 फीसदी ने स्वीकार किया है कि लगातार आघात पहुंचाने वाले दृश्यों ने उनके दिमाग को बीमार किया है।

इनमें से 17.5 फीसदी मनोचिकित्सकों से थेरैपी करवा रहे हैं। बाकी दूसरे तरीकों से सामान्य होने का प्रयास कर रहे। दिल को झकझोर देने वाली यह जानकारी करीब एक हजार डॉक्टर व नर्सों पर चीन और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययन में सामने आए हैं।

चीन का वुहान शहर जनवरी-फरवरी में कोरोनावायरस संक्रमण का केंद्र बना रहा था। इसके इलाज में जुटे हजारों डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ ने भी ऐसे विकट भावनात्मक हालात झेले। प्रमुख संस्थानों ने इसके असर को समझने के लिए वुहान के 994 चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के बीच अध्ययन करवाया तो यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

इन भावनात्मक आवेगों को झेला
  • इन लोगों ने महामारी की शुुरुआत में डर और बेचैनी महसूस की। बाद में उनमें अवसाद और पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस के लक्षण सामने आए।
  • संक्रमण के जोखिमपूर्ण वातावरण में और संक्रमित लोगों के लिए काम करना इसकी प्रमुख वजह बनी।
  • पूर्व में हुए इस प्रकार के अध्ययनों के अनुसार डॉक्टरों के दिमाग पर यह असर जीवन भर बना रहता है।

राहत के लिए क्या किया

  • 36.3 फीसदी मनोविज्ञान की किताबें पढ़ रहे।
  • 50.4 फीसदी ऑनलाइन सामग्री पढ़ रहे सेल्फ हेल्प समूहों की मदद ले रहे।
  • 17.5 प्रतिशत मनोचिकित्सकों से काउंसलिंग और थेरैपी ले रहे।

सिफारिश: 17 फीसदी मनोचिकित्सकों से करवा रहे थेरैपी
अध्ययन के अनुसार बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मी महामारी के समय मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझते नजर आए। ऐसे में उनकी समस्याओं पर ध्यान देने और पहले से उन्हें इन हालात के लिए तैयार करने की सिफारिश की गई है। भविष्य में या बाकी देशों में ऐसे हालात होने पर वहां भी व्यापक तैयारियों की जरूरत बताई गई है।

अध्ययनकर्ता संस्थान

ब्रेन बिहेवयर एंड इम्यूनिटी जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित इस अध्ययन को रेनमिन अस्पताल वुहान विवि के मनोचिकित्सा व नर्सिंग विभाग, कैलिफोर्निया विवि के मनोचिकित्सा विभाग, हुआझोंग विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय वुहान के कंप्यूटर साइंस विभाग और वुहान विवि के स्वास्थ्य विज्ञान स्कूल आदि ने पूरा किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next