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फैक्स मशीन की वजह से अमेरिका का एक शहर कोरोना से जंग में खा रहा मात! 

Tue, 14 Jul 2020 08:55 PM IST
अमित कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ह्यूस्टन
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Fax machine - फोटो : social media
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पूरी दुनिया की तरह अमेरिका भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। अब तक 34 लाख से ज्यादा अमेरिकी इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। अमेरिका के अधिकतर शहर कोरोना से जंग में संघर्ष कर रहे हैं। ह्यूस्टन की कहानी भी अलग नहीं है। यहां अब तक 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। मगर कोरोना से जंग में पिछड़ने के पीछे यहां एक अनूठा ही कारण है। वो है एक फैक्स मशीन। 

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ह्यूस्टन के पब्लिक हेल्थ अधिकारी कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई स्थिति से निपटने में संघर्ष कर रहे हैं। वे सभी मामलों को ट्रेस करना चाहते हैं और मरीजों को समय रहते ही क्वांरटीन करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वो किसी और संक्रमित न करे। मगर इसे पूरा करने के लिए हर रोज कार्यालय की फैक्स मशीन से दो चार होना पड़ रहा है। 

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में हैरिस काउंटी सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को एक लैब ने बहुत ही बड़ी संख्या में डाटा फैक्स के जरिए भेज दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि जांच रिपोर्टों के सैंकड़ों पन्ने पूरे फर्श पर इधर-उधर फैल गए। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फैक्स मशीन से सैकड़ों तस्वीरें निकल रहीं हैं। मशीन में हर थोड़ी देर में कागज खत्म् हो जा रहे हैं। कुछ डॉक्टर तो विभाग के डॉक्टरों के निजी नंबर पर भी रिपोर्ट भेज रहे हैं। 
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दरअसल अमेरिका के स्वास्थ्य सिस्टम के सामने नई और पुरानी तकनीक के बीच तालमेल बैठाने में दिक्कत हो रही है। सरकारी और निजी लैब हर रोज पचास लाख से ज्यादा टेस्ट कर रही हैं। मगर इतने बड़े डाटा को संभालकर रखने की व्यवस्था विभाग के पास है ही नहीं। 

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गलत विभागों में पहुंच रही रिपोर्ट 

अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग में जांच रिपोर्ट को संभालने की प्रणाली बेहद आसान है। मगर डिजिटल डाटा निजता के मानकों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट फोन, ईमेल, डाक और फैक्स के जरिए भी भेजी जाती हैं। इस वजह से दिक्कतें आ रही हैं। जांच रिपोर्ट गलत विभाग के पास चली जा रही है या फिर अहम जानकारी गायब हो जा रही है...जैसे मरीज का फोन नंबर या पता। 

ट्रेसिंग के काम में आ रही बाधा 
जानकारी को डिजिटल तरीके से ठीक से न रख पाने की वजह से बीमारी को फैलने से रोकने में दिक्कतें आ रही हैं। मरीजों की निजी जानकारी गुम हो जाने से ट्रेसिंग का काम ठीक से नहीं हो पा रहा है। साथ ही मरीजों की पहचान को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि चिंता की बात यह है कि डाटा की तुलना में बीमारी ज्यादा तेजी से फैल रही है। 
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