अमेरिका के सिएटल में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए नई वैक्सीन का परीक्षण हो रहा है। जिन पर परीक्षण होना है उनके हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि लोगों की मदद के लिए उन्होंने ये रास्ता चुना है। इस मोड़ पर हम अपनी जिंदगी हाथ धोकर और वर्क फ्रॉम होम की बजाए इस वायरस से लड़कर बिताना चाहते हैं।
सामान्य फ्लू वैक्सीन जितना दर्द
जिन तीन लोगों को इंजेक्शन दिया गया उनका कहना है एक सामान्य फ्लू वैक्सीन जितना ही उन्हें दर्द हुआ। इनमें से कुछ लोगों को ज्यादा सख्त डोज दिया जाएगा ताकि देखा जा सके कि डोज की अधिकतम सीमा क्या हो सकती है। इनपर साइड इफेक्ट का असर भी देखा जाएगा। ये भी देखा जाएगा कि इनकी प्रतिरोधक क्षमता कितनी है।
इन वालंटियर्स का कहना है कि उनकी मंशा खुद को बचाने की नहीं है। इनका कहना है कि हमारी भूमिका इस मायने में छोटी है कि 18 महीने तक चलने वाली ये कोशिश कामयाब हो और पूरी दुनिया को इसका लाभ मिले। ये वालंटियर टेक इंडस्ट्री और स्वास्थ्य रिसर्च में काम करते हैं। इनमें से दो वालंटियर के बच्चे हैं और सभी घर पर रहकर ही काम कर रहे हैं।
जेनिफर के दो बच्चे
टेक कंपनी में कार्यरत 43 साल की ऑपरेशन मैनेजर जेनिफर हॉलर सहित माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाले 46 साल के नेटवर्क इंजीनियर और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के ग्लोबल हेल्थ रिसर्च सेंटर में काम करने वाले 25 साल के एडिटोरियल कोऑर्डिनेटर इस मुहिम से जुड़े हैं।
43 साल की जेनिफर हॉलर के दो बच्चे हैं। पहला इंजेक्शन जेनिफर को ही लगा है। वैक्सीन के परीक्षण का पहला इंजेक्शन लगवाने के बाद जेनिफर ने बेहद खुशी जताते हुए कहा कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
जेनिफर हॉलर रोज सुबह अपने 16 साल के बेटे और 13 साल की बेटी को सेब काटकर खिलाती हैं। अब उनके बच्चे खुद से ही खाना बनाकर खाते हैं। उनके स्कूल जाने से पहले ही जेनिफर काम पर लग जाती हैं।
पति की गई नौकरी
उनके पति एक सॉफ्टवेयर टेस्टर हैं जिन्हें पिछले हफ्ते ही नौकरी से निकाल दिया गया। इससे परिवार की आमदनी आधी होगी। मौजूदा हालात में नौकरी तलाशना भी मुश्किल है। जेनिफर कहती हैं, मुझे लगता है कि शायद हमें उसके लिए छह महीने तक काम करने की तैयारी करनी होगी।
जेनिफर सिएटल में एक छोटी टेक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर की नौकरी करती हैं। उन्हें तीन मार्च को फेसबुक के जरिए वैक्सीन रिसर्च के बारे में पता चला। वॉशिंगटन रिसर्च इंस्टूट्यूट ने भर्ती शुरू की और उन्होंने इसके लिए तुरंत फॉर्म भर दिया। दो दिन बाद उन्हें अनजान नंबर से फोन आया जो रिसर्च टीम की ओर से आया था।