फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीडीसी ने कहा- टीका लगवाने वालों में संक्रमण को लेकर निगरानी जरूरी नहीं

Thu, 27 May 2021 07:26 AM IST
Kuldeep Singh न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
विज्ञापन
कोरोना टीका - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

अमेरिका में टीका लगवा चुके लोगों को कोरोना जांच की जरूरत नहीं है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद भी टीका लगवा चुके व्यक्ति को क्वारंटीन होने या जांच कराने की जरूरत नहीं है, जब तक कोई लक्षण नहीं दिखता है।

विज्ञापन


लक्षण न होने पर क्वारंटीन होने या जांच कराने की जरूरत नहीं, अमेरिका में दोबारा संक्रमण के 10,262 केस मिले
सीडीसी ने कहा कि टीके की दोनों डोज लगवाने वाले व्यक्ति में दोबारा संक्रमण को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। दोबारा संक्रमण की चपेट में आने और पर सिर्फ गंभीर लक्षण वाले अस्पताल में भर्ती या मृत्यु हो जाने की स्थिति में ही जांच होगी। सीडीसी ने बताया कि अप्रैल तक अमेरिका में 10.1 करोड़ लोगों को टीका लगा था। इसमें से 46 राज्य में दोबारा संक्रमण के 10,262 मामले सामने आए थे।

टीका असरदार और सुरक्षित
सीडीसी का कहना है कि 10 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगा। उसमें सिर्फ कुछ लोगों में दोबारा संक्रमण के मामले आए हैं। इससे साबित होता है कि टीका पूरी तरह सुरक्षित है। इसी को आधार बनाकर यह फैसला लिया गया है कि अब दोबारा संक्रमण के उन्हीं मामलों की जांच होगी, जिनकी स्थिति गंभीर होगी।
विज्ञापन


दोबारा संक्रमण से मरने वालों की औसत उम्र 82 वर्ष
सीडीसी के अनुसार, दोबारा संक्रमण के 10,262 मामलों में से 555 मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई गई थी, जो कुल मामलों का सिर्फ 5 फ़ीसदी था। संक्रमण की चपेट में आकर 160 लोगों की मौत भी हुई। लेकिन अधिकतर मौतों का कारण कोरोना नहीं था।  दोबारा संक्रमण से मरने वालों की औसत उम्र 82 वर्ष थी।

दूसरे को संक्रमण ये पता नहीं 
51 और 65 वर्ष के दो लोगों में वायरल सीक्वेसिंग से दोबारा संक्रमण के पुष्टि हुई है। एक मरीज में अधिक वायरल लोड मिला था। हालांकि मरीज ने किसी दूसरे को संक्रमित किया इसका पता नहीं चल पाया है। 

फैसले पर उठ रहे सवाल भी

आलोचना : अभी निगरानी जरुरी 
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर अली मोकदाद का कहना है यह फैसला आंख बंद करके चलने जैसा है जिसके कारण हम कई अहम तथ्यों को हासिल करने से चूक जाएंगे। आप कैसे किसी एक केस को पकड़कर इस तरह के मामलों की तह तक जा सकते हैं। अभी वक्त हर स्थिति पर नजर रखने का है।

बहुरूपिया वायरस, शोध जरुरी 
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर रिसर्च इनोवेशन एंड बायोटेक्नोलॉजी के इम्यूनोलॉजिस्ट माइकल किंच का कहना है कि वायस लगातार अपना रूप बदल रहा है। हमें वायरस से हमेशा तीन कदम आगे रहना होगा। सीडीसी को अभी ऐसी कोई गलती नहीं करनी है जिससे वायरस दोबारा हावी हो सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें