कोरोना वायरस सच में बहुरूपिया है। शरीर के किसी अंग में छिपकर बैठता है और अपना कुनबा बढ़ाकर व्यक्ति को मौत की नींद सुला देता है। अब वैज्ञानिकों को पता चला है कि संक्रमण और पहली बार लक्षण दिखने के 21 दिन बाद तक वायरस आंखों में रह सकता है।
डॉक्टरों ने इस केस को गंभीरता से लिया और आंखों से फ्ल्यूड निकालकर उसकी रोज जांच करते रहे। इस दौरान पता चला कि वायरस महिला की आंखों में छिपा था। डॉक्टरों के अनुसार वायरस महिला की आंखों में 21 दिन तक रहा। खास बात ये रही कि नाक के स्वैब में वायरस नहीं था लेकिन आंखों के फ्ल्यूड में पांच दिन बाद भी वायरस मिला था।
शोधकर्ता ने नेत्र रोग विशेषज्ञों को आंख संबंधी तकलीफ लेकर अस्पताल आने वाले मरीजों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। मरीज की आंखों की जांच करते वक्त सावधान रहना होगा। आंखों की सतह वायरस का घर होने के साथ फैलाव का कारण बन सकती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि वायरस आंखों के फ्ल्यूड में अपनी प्रतिलिपियां बनाता रहता है। एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों का दावा है कि आंखों के म्यूकस और आंसुओं में भी वायरस रहता है, जो दूसरों को संक्रमित कर सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले व्यक्ति में सबसे सामान्य लक्षण बुखार का है। कुछ मामलों में ये भी देखा गया है कि बुखार के साथ आंखें गुलाबी रंग की दिखती है। ऐसे में सावधानी बरतें और आंखों को समय-समय पर जांचते रहें।
बच्चों में कोरोना वायरस के अलग तरह के लक्षण दिखने लगे हैं। इटली के त्वचा रोग विशेषज्ञों को पता चला है कि बच्चों केअंगूठे और तलुए में सूजन के साथ उसमें लाली दिख रही है। डॉक्टरों ने इसे कोविड-टो नाम दिया है। इटली के बाद अब इस तरह के मामले अमेरिका और बोस्टन में भी देखने को मिल रहे हैं।