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ब्रिटेन: 30 साल से कम उम्र वालों को नहीं लगाया जाएगा एस्ट्राजेनेका का टीका

अमर उजाला रिसर्च टीम, लंदन Published by: देव कश्यप Updated Thu, 08 Apr 2021 06:32 AM IST

सार

  • मार्च तक कंपनी के टीके से 79 लोगों में खून का थक्का जमने का दावा, 19 मरे
  • 18-29 साल की आबादी को अब लगेगा मॉडर्ना या फाइजर का टीका
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock


संस्था ने अपनी जांच में पाया है कि मार्च तक एस्ट्राजेनेका का टीका लेने वाले 79 लोग थक्का जमने (क्लॉटिंग) के शिकार हुए थे, जिनमें से 19 की मौत हुई। मरने वालों में तीन की उम्र 30 से कम थी। इसके बाद यूरोप के दर्जनों देशों में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


हालांकि, नियामक का कहना है कि उसे क्लॉटिंग के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं लेकिन वैक्सीन से संबंध गहराता जा रहा है। इसके चलते उसे दूसरे टीके के इस्तेमाल की सिफारिश करनी पड़ रही है। एमएचआरए के मुताबिक, वैसे तो -एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साइड इफेक्ट बहुत ही विरले हैं और इसकी क्षमता में कोई कमी नहीं है।


महामारी के जोखिम को देखते हुए  वैक्सीन के फायदे अब भी बहुत ज्यादा हैं। ब्रिटेन में अब तक दो करोड़ लोगों को एस्ट्राजेनेका का टीका लगा है, जिनमें से महज 79 लोगों को ही मस्तिष्क या धमनियों में क्लॉटिंग से जूझना पड़ा। यानी प्रति 2.50 लाख लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति इसका शिकार हुआ, जो अपने आप में दुर्लभ है।


दवा नियामक एमएचआरए ने जांच के बाद दी सिफारिश

 

जिन्होंने पहली खुराक ली, वे दूसरी भी लें: नियामक ने कहा है, जिन लोगों ने कंपनी की पहली खुराक ली है, उन्हें दूसरी खुराक भी लेनी चाहिए। हालांकि जिन लोगों को क्लॉटिंग का सामना करना पड़ा है, उन्हें इसकी दूसरी खुराक न लेने की सलाह दी गई है।



अब लगेगा मॉडर्ना या फाइजर का टीका: सलाहकार संस्था जॉइंट कमेटी ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्यूनाइजेशन (जेसीवीआई) ने 18-29 साल से कम आयु वाले लोगों को आने वाले महीनों में मॉडर्ना या फाइजर की वैक्सीन देने की बात कही है। वैसे विशेषज्ञों के मुताबिक, एस्ट्राजेनेका के टीके के सीमित उपयोग से देश के टीकाकरण अभियान को भी झटका लगना तय है।

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