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कोरोनाः फाइजर का टीका भी नहीं होगा रामबाण! प्रमुख वैज्ञानिक ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 16 Nov 2020 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

  • वैज्ञानिकों की राय, हालात बेहतर होने में लगेगा कम से कम एक साल
  • कंपनी ने कहा, टीका सौ फीसदी नहीं, नब्बे फीसदी प्रभावी होगा
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Pfizer Coronavirus Vaccine - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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फाइजर कंपनी के कोरोना वायरस की वैक्सीन बना लेने के एलान से बना उत्साह का माहौल अब कुछ ठंडा पड़ रहा है। बाद में सामने आई जानकारियों से लोगों को अब अहसास हो रहा है कि ये वैक्सीन भी तुरंत इस महामारी पर काबू पाने में सहायक नहीं होगी। खुद टीका तैयार करने के फाइजर और बायो-एनटेक कंपनी के साझा प्रयासों से जुड़े रहे एक प्रमुख वैज्ञानिक ने आगाह किया है कि जितनी बड़ी संख्या में लोग इससे संक्रमित हैं, उसे घटाने में तुरंत कामयाबी नहीं मिलेगी। हालत बेहतर होने में कम से कम एक साल लगेगा।

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बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में वैज्ञानिक प्रो. उगुर साहिन ने कहा कि टीका जारी होने के बाद संक्रमित लोगों की संख्या घटने में महीनों लगेंगे। प्रो. साहिन बायो-एनटेक कंपनी के सह-संस्थापक हैं। उन्होंने कहा- अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले साल सर्दियों तक आम हालत बहाल हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी आने वाले कई महीने मुश्किल भरे होंगे।

फाइजर और बायो-एनटेक ने कहा है कि उनका टीका 90 फीसदी तक प्रभावी होगा। लेकिन कई जानकारों ने इसकी सुरक्षा, इसके ठीक-ठीक होने वाले असर और वितरण को लेकर सवाल उठाए हैं। अभी पहली चुनौती अलग-अलग देशों में इसके इस्तेमाल की मंजूरी मिलने की है। अमेरिका में वहां के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने निर्माता कंपनियों से कहा था कि दूसरी खुराक देने के बाद दो महीनों तक के सुरक्षा आंकड़े वे पेश करें। इसके बाद इस टीका के इस्तेमाल की इजाजत दी जाएगी।
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फाइजर कंपनी का कहना है कि नवंबर के तीसरे हफ्ते तक वह ये काम पूरा कर लेगी। उसके मुताबिक इस टीके का परीक्षण करीब 40 हजार लोगों पर किया गया है। उन सबको दो खुराकें दी गई हैँ। फाइजर इस साल पांच करोड़ और 2021 में एक अरब 30 करोड़ खुराक उत्पादित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। फाइजर ने कहा है कि आम लोगों को ये टीका लगवाने के लिए एक साल या उससे अधिक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि सबसे पहले इसे उन लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें संक्रमण लगने का ज्यादा खतरा है।

इस वक्त दुनिया भर में लगभग दर्जन भर वैक्सीन का इंसान पर ट्रायल चल रहा है। ये सभी ट्रायल अपने तीसरे चरण में हैं। अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन की कंपनियां पिछले कई महीनों से ये ट्रायल आगे बढ़ा रही हैं। अगस्त में रूस ने सबसे पहले वैक्सीन बना लेने का दावा किया था। लेकिन तब उसकी इस बात के लिए कड़ी आलोचना हुई थी कि उसने बिना व्यापक परीक्षण के ये घोषणा कर दी। चीन की तीन कंपनियां अपने-अपने वैक्सीन का परीक्षण कर रही हैं।

इस बीच एक बड़ा सवाल ये उठा है कि आखिर ये वैक्सीन किस कीमत पर आम लोगों को उपलब्ध होंगी। दुनिया के हर देश में इनके वितरण को एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। कोरोना वायरस की बन रही वैक्सीन के स्टोरेज (भंडारण) के लिए कुछ खास जरूरतें होंगी। जानकारों के पास गरीब देशों में इनके भंडारण का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। आम तौर पर दूसरे रोगों की वैक्सीन को सामान्य रेफ्रीजरेटर में रखना काफी होता है। लेकिन कोरोना वायरस की वैक्सीन को माइनस 80 डिग्री के तापमान पर रखना होगा। तापमान को इस सीम तक नीचे ले जाने वाले रेफ्रीजरेटर धनी देशों के बड़े अस्पतालों में भी अभी मौजूद नहीं हैं। फाइजर ने कहा है कि जमीन और हवाई मार्ग से टीका के परिवहन के लिए वह ड्राइ आइस के इस्तेमाल की योजना बना रही है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक संपूर्ण टीकाकरण के लिए दो सूइयां लगवानी होंगी। जानकारों के मुताबिक हर व्यक्ति को सही समय पर दोनों सूइयां लग जाएं, इसे सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। फिर अभी यह सिर्फ मालूम है कि फाइजर का टीका लगवाने के बाद कोई व्यक्ति को संक्रमण लगने के बावजूद बीमार नहीं पड़ेगा। लेकिन क्या टीका संक्रमण को रोकने में कामयाब होगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।

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